-श्योपुर-सबलगढ़ के 106 किलोमीटर के रूट पर 18 कॉशन ऑर्डर लगे, 5 से 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ट्रेन-ट्रेक लिफ्ंिटग और मेंटेनेंस कार्य के भी बताए कारण, लेकिन ट्रेक लिफ्ंिटग का कार्य एक साल पहले हुआ-दो से तीन घंटे की देरी से अपने गंतव्य को पहुंच रही जिले की लाइफ लाइन, यात्री हो रहे परेशान
श्योपुर,
जिले की लाइफ-लाइन कही जाने वाली नैरोगेज ट्रेन बीते एक पखवाड़े से अपने छुक-छुक गाड़ी के नाम को चरितार्थ करते हुए साइकिल की रफ्तार से चल रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि कहीं पुल जर्जर होने तो कहीं मेंटेनेंस और टे्रक लिफ्ंिटग कार्य के नाम पर रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने कॉशन ऑर्डर लगा रखे हैं।
जबकि ट्रेक के धरातल पर स्थिति ये है कि वर्तमान में न तेा कहीं मेंटेनेंस का काम चल रहा है और न ही ट्रेक लिफ्ंिटग कार्य हो रहा है। विशेष बात यह है कि जिस टे्रक लिफ्ंिटग के कार्य के नाम पर कॉशन ऑर्डर लगाया गया है, वो लिफ्ंिटग कार्य एक साल पहले हुआ था। वर्तमान में श्योपुर से सबलगढ़ तक के 18 कॉशन ऑर्डर लगाए हुए हैं, जिसके कारण ट्रेन की गति 5 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर चल रही है। यही वजह है कि श्योपुर-सबलगढ़ के बीच चलने वाली ट्रेनें दो घंटे की देरी से चल रही हैं, जबकि ग्वालियर से श्योपुर आने वाली ट्रेन भी तीन घंटे की देरी से पहुंच रही है। जिसके चलते यात्रियों को काफी परेशानियां उठानी पड़ रही है।
कहीं बताया ट्रेक कमजोर, कहीं पुल का मेंटनेंस
श्योपुर से सबलगढ़ तक के 106 किलोमीटर के रूट पर ही 18 कॉशन ऑर्डर है। इन 18 कॉशन ऑर्डर की सूची बनाकर ट्रेन ड्रायवरों को दी जाती है। कॉशन ऑर्डर की सूची के मुताबिक श्योपुर से खोजीपुरा के बीच ट्रेक मजबूत बनाने का कार्य जारी के कारण के नाम पर 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार बांधी हुई है, जबकि ट्रेन ड्रायवरों का कहना है कि ट्रेक पर कहीं भी काम होता नहीं दिखता है। वहीं गिरधरपुर से खोजीपुरा के बीच 1390 से 1392 किमी के बीच लिफ्ंिटग कार्य बताते हुए गति 10 किमी निर्धारित की है, जबकि इकडोरी से वीरपुर के बीच 1353 से 1354 किमी के बीच लिफ्ंिटग कार्य के नाम पर ट्रेन की गति 5 किमी प्रति घंटा निर्धारित की है, जबकि धरातलीय स्थिति ये है कि दोनों ही जगह कोई लिफ्ंिटग कार्य नहीं हो रहा है। जबकि गिरधरपुर और खोजीपुरा के बीच व खोजीपुरा से इकडोरी के बीच दो जगह पुल के मरम्मत के नाम पर कॉशन ऑर्डर हैं।
दो से तीन घंटे देरी से चल रही ट्रेन
कॉशन ऑर्डर के कारण सुबह 6 बजे सबलगढ़ से चलकर सुबह साढ़े 11 बजे श्योपुर पहुंचने वाली टे्रन दोपहर डेढ़ बजे पहुंच रही है, जबकि श्योपुर से दोपहर 2.05 बजे चलकर शाम साढ़े 7 बजे सबलगढ़ पहुंचने वाली ट्रेन रात साढ़े 9 बजे पहुंच रही है। वहीं आगे सबलगढ़ से ग्वालियर के बीच भी कुछ कॉशन ऑर्डर है, जिसके कारण ग्वालियर से श्योपुर आने वाली ट्रेन भी रात में तीन घंटे की देरी से आ रही है। ऐसे में यात्री परेशान हैं। यात्रियों का कहना है कि ये ट्रेनें दिन की है और अभी रात तक श्योपुर या सबलगढ़ पहुंचती है, ऐसे में बोगियों में कोई घटना हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा। ऐसे में अनावश्यक लगाए गए कुछ कॉशन ऑर्डर हटाए जाएं।
यह है कॉशन ऑर्डर
कॉशन ऑर्डर लगाकर ट्रेनों की अधिकतम स्पीड का निर्धारण किया जाता है। जिस भी जगह या जिन किमी क्रमांक के बीच यह लागू किया जाता है, वहां उससे अधिक रफ्तार से लोको पायलट ट्रेन नहीं चला सकते। कर्व, ब्रिज सहित स्टेशनों के आउटर आदि पर परमानेंट कॉशन ऑर्डर लागू रहते हैं, लेकिन अस्थाई कॉशन ऑर्डर ट्रैक सुधार, मेंटेनेंस आदि के दौरान लगाए जाते हैं।
रिवाइज कर दिए हैं कॉशन ऑर्डर
बारिश के बाद लगाए गए 7-8 कॉशन ऑर्डर तो हटा दिए गए हैं, साथ ही कुछ हमने रिवाइजर कर दिए हैं। जबकि कुछ स्थाई हैं, जिन्हें हम नहीं हटा सकते। लिफ्ंिटग कार्य का कोई कॉशन ऑर्डर नहीं है, यदि सूची में है तो गलत लिखा है, हम उसे बदलवा देंगे। दिसंबर-जनवरी में लिफ्ंिटग कार्य हुआ था, लेकिन ठेकेदार बीच में कार्य छोड़ गया।
बने सिंह
पीडब्ल्यूआई, रेलवे इंजीनियरिंग खंड श्योपुर