खेतों तक नहीं पहुंचा पानी, मामला विकासखंड कराहल का
श्योपुर जिले की कराहल तहसील में उद्वहन सिंचाई योजना गोरस के दो दर्जन से अधिक आदिवासी किसानों के लिए छलावा साबित हुई है। योजना के तहत बोरिंग खनन करने के साथ बिजली कनेक्शन तक किसानों को मिल गए, लेकिन बोरिंग में पिछले दो साल से समर्सिबल मोटर नहीं डल पाई। जिससे पांच ग्रुप के 26 किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंच सका और खेत सूखे रह गए। इन दो सालों में किसानों ने जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर को दस से अधिक आवेदन दिए, लेकिन तत्कालीन कलेक्टर पीएल सोलंकी द्वारा योजना शुरू किए जाने का हवाला देकर इस योजना को अफसरों से ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
उल्लेखनीय है कि आदिवासी विकासखण्ड कराहल में जनजाति सहरिया किसानों के सूखे खेतों पर सिंचाई का साधन जुटाने ने के लिए तत्कालीन कलेक्टर पीएल सोलकी ने आदिम जाति कल्याण विभाग सहित अन्य विभाग और सहरिया किसानों से अनुदान की राशि लेकर सिंचाई के लिए बोरिंग खनन, समर्सिबल मोटर एव खेतों तक बिजली कनेक्शन लगाकर दिया था।
दो साल ने नहीं कर पा रहे फसल
सहरिया आदिवासी दो साल से फसल नहीं कर पा रहे हैं। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही हैं। ऐसे में उन्हें मजदूरी के लिए पयालन करना पड़ रहा है। बताते हैं कि बजट के अभाव में योजना को पूरा नहीं किया जा सका।
साढ़े तीन लाख अनुदान दिया था किसानों ने
गोरस के आदिवासी किसानों से 15-15 हजार रुपए एकत्रित कर करीब साढ़े तीन लाख रुपए अनुदान बतौर दिए थे। लेकिन किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल सका। किसान अब सूखे खेतों की रखवाली कर रहे हैं।
बिजली बिल से परेशान किसान
गोरस के पांच ग्रुप के करीब २६ किसानों के खेतों में लगे ट्रांसफॉर्मर का बिजली कनेक्शन हो चुका है जिनके बिजली बिल भी शुरू हो गए हैं। किसानों को मोटर बिना चले ही बिजली बिल चुकाने का डर बना हुआ है।