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संस्कृति और जनजाति के शोधार्थियों का पाठ्यक्रम बना सहरिया संग्रहालय

श्योपुर में है देश का इकलौता सहरिया संग्रहालय, 30 सालोंं से सहरिया आदिवासी संस्कृतिक का परिचायक

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संस्कृति और जनजाति के शोधार्थियों का पाठ्यक्रम बना सहरिया संग्रहालय

संस्कृति और जनजाति के शोधार्थियों का पाठ्यक्रम बना सहरिया संग्रहालय

श्योपुर,
आदिवासी बाहुल्य श्योपुर जिले में सहरिया जनजाति की संस्कृति जितनी अनूठी है, उतना ही अनूठा है श्योपुर का सहरिया संग्रहालय है। जिला मुख्यालय के ऐतिहासिक किले में स्थापित सहरिया संग्रहालय न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश का इकलौता सहरिया संग्रहालय है। जो न केवल सहरिया संस्कृति का परिचायक है, बल्कि आदिवासी संस्कृति या जनजातियों पर शोध करने वाले छात्रों के लिए भी ये एक अप्रत्यक्ष पाठ्यक्रम बन चुका है, जहां बड़ी संख्या में शोधार्थी छात्र पहुंचकर सहरिया जनजाति की जानकारी हासिल करते हैं।

सहरिया जनजाति की के संरक्षण एवं संवर्धन की दृष्टि से सहरिया विकास अभिकरण, नगरपालिका श्योपुर और पुरातत्व संरक्षण समिति के माध्यम से सहरिया संग्रहालय की परिकल्पना की गई। ग्वालियर-चंबल के तत्कालीन कमिश्नर और सहरिया विकास प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष अजय शंकर ने वर्ष 1986 में इसके लिए पुरातत्व संरक्षण समिति बनाई। समिति ने जिले के सहरिया गांवों में पहुंचकर न केवल अध्ययन किया बल्कि सहरिया संस्कृति से जुड़ी सामग्री संकलित की। जिसके बाद वर्ष 1990 में श्योपुर किला स्थिति बड़े भवन में सहरिया संग्रहालय स्थापित किया गया। श्योपुर के एतिहासिक किला परिसर में संचालित इस संग्रहालय में सहरिया समाज की संस्कृति के जीवंत दर्शन होते हैं। सहरिया समाज के खान-पान, रहन-सहन, पहनावा, ज्वैलरी, आवास आदि के बारे में संग्रहालय में विस्तार से डिस्पले किया हुआ है। ज्वैलरी सेक्शन में सहरिया महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले आभूषण, वनोपज सेक्शन में सहरिया समाज की वनोपज आजीविका के बारे में भी अलग से बताया गया है। कुएं से पानी भरने, हथाई या बंगला, सहरियाओं के वाद्ययंत्र, सहरिया बच्चों के खिलौने आदि से सहरिया संस्कृति के अनूठेपन का अहसास कराते हैं।

सहरिया संग्रहालय पूरे देश में एकमात्र संग्रहालय है, जिसमें सहरिया जनजाति से जुड़ी चीजें और उनकी संस्कृति प्रदर्शित की गई है। यही वजह है कि जनजातियों पर शोध करने वाले छात्र यहां आते हैं।
आदित्य चौहान
प्रभारी, सहरिया संग्रहालय श्योपुर

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