बड़े बाड़े में नामीबियाई विशेषज्ञ सहित चार सदस्यीय टीम कर रही चीतों की मॉनिटरिंग
श्योपुर,
कूनो नेशनल पार्क के एक बड़े बाड़े में छोड़े गए दोनों चीते न केवल शिकार कर चुके हैं, बल्कि स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। चीतों पर निगरानी करने के लिए विशेषज्ञों की चार सदस्यीय टीम सुबह शाम बाड़े में पहुंचकर निगरानी कर रही है। विशेष बात यह है कि टीम में एक सदस्य हाथ में रेडियो कॉलर का एंटीना लेकर जा रहा है, ताकि बाड़े में चीतों की लोकेशन ट्रेस की जा सके। तीन दिन की मॉनिटरिंग की और अध्ययन में पाया गया है कि बड़े बाड़े में दोनों चीतों का बेहतर व्यवहार है और उन्हें कूनो का जंगल रास आ गया है। दोनों चीतों के बेहतर व्यवहार से कूनो प्रबंधन सहित भोपाल और दिल्ली तक के विशेषज्ञ व अफसर उत्साहित हैं।
17 सितंबर को नामीबिया से लाने के बाद से क्वॉरंटीन किए गए 8 चीतों में से दो चीतों (जो सगे भाई भी हैं) 5 नवंबर की शाम को बड़े बाड़े में छोड़े गए। जिसके बाद जहां सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरों से तो दोनों चीतों की मॉनिटरिंग की जा रही है, वहीं चार सदस्यीय एक विशेष टीम भी निगरानी कर रही है। इस टीम में नामीबिया से चीतों के साथ आए वन्यजीव विशेषज्ञ वाट भी शामिल है, जबकि भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के एक विशेषज्ञ के साथ कूनो के एक डॉक्टर और एक वनरक्षक को शामिल किया गया है। ये टीम प्रतिदिन सुबह 7 बजे और शाम 4.30 बजे बाड़े में पहुंच रही है और चीतों की लोकेशन और उनके व्यवहार पर अध्ययन कर रही है। एक खुली जीप में सवार होकर ये टीम रेडियो कॉलर का सिग्नल प्राप्त करने वाला एक एंटीना साथ लेकर बाड़े में भ्रमण करती है और चीतों पर नजर रखती है।
98 हेक्टेयर के बाड़े में दोनों भाईयों का राज
कूनो नेशनल पार्क की आवोहवा में ढालने के लिए अफ्रीकी चीतों को कुछ महीनों तक बाड़े में ही रखा जाना है। यही वजह है कि कूनो में 500 हेक्टेयर (5 वर्ग किलोमीटर) का एक पूरा बाड़ा बनाया गया है। इसी बाड़े में फिर छोटे-छोटे कुछ क्वॉरंटीन बाड़े बनाए गए हैं, वहीं अलग-अलग आकार के 8 बड़े बाड़े भी बनाए गए हैं। जिनका आकार 40 हेक्टेयर से 110 हेक्टेयर तक का है। इन्हीं में शामिल 98 हेक्टेयर के एक बड़े बाड़े में इन दोनों भाई चीतों को छोड़ा गया। जबकि अन्य बाड़ों में शेष चीते छोड़े जाएंगे।
छह चीतों को बड़े बाड़े का करना होगा इंतजार
8 में से 2 चीते बड़े बाड़े में छोड़ दिए गए, लेकिन अभी 6 चीतों(1 नर व 5 मादा) को लेकर कोई निर्णय नहीं हो सका है। बताया है कि अभी इन 6 चीतों को बड़े बाड़े में जाने के लिए कुछ दिन का और इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि विशेषज्ञ पहले दोनों चीतों के व्यवहार का अध्ययन कर रहे हैं, वहीं क्वॉरंटीन बाड़ों के चीतों की स्थिति का भी आंकलन किया जा रहा है। यही वजह है कि चीता टास्क फोर्स के सदस्य कुछ दिन बाद इस पर निर्णय करेंगे।
छह दिन से नहीं दिखा तेंदुए, एक विशेष टीम लगाई
बड़े बाड़े के किसी एक कंपार्ट में घुसा एक तेंदुआ अभी बाहर निकल गया है या भीतर ही है, ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है। हालांकि पिछले 6 दिन से ये तेंदुआ ट्रेस नहीं हुआ है, लेकिन बाड़े के बाहर लगे कैमरों में भी ये कैप्चर नहीं हुआ है। जिसके चलते अभी भी इसके बाहर निकलने पर संशय बना हुआ है। यही वजह है कि तेंदुए को ट्रेस करने और उसके बाहर निकालने के लिए एक 4 सदस्यीय विशेष टीम इसी काम के लिए लगी हुई है। जिसमें डब्ल्यूआईआई के विशेषज्ञ सहित अन्य लोग शामिल हैं।
मॉनिटरिंग की जा रही है
बड़े बाड़े में छोड़े गए दोनों चीतों की मॉनिटरिंग लगातार की जा रही है। तीन दिनों की मॉनिटरिंग के बाद पाया गया कि चीते बेहतर ढंग से सर्वाइव कर रहे हैं। रहीं बात तेंदुए के निकलने की तो इस संबंध में हमारी टीम लगी हुई है।
पीके वर्मा
डीएफओ, कूनो नेशनल पार्क श्योपुर