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जल संरक्षण के काम करेंगे जिले के मजदूर, 513 को मिला रोजगार, बढ़ेगी मजदूरों की संख्या

कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश भर में किए गए लॉकडाउन में बड़ी इंडस्ट्रीज के साथ गांव में होने वाले विकास कार्य भी ठप हो गए थे। जिसके चलते हर दिन कमाने वाले मजदूरों की आर्थिक स्थिति अधिक खराब हो गई।

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जल संरक्षण के काम करेंगे जिले के मजदूर, 513 को मिला रोजगार, बढ़ेगी मजदूरों की संख्या

जल संरक्षण के काम करेंगे जिले के मजदूर, 513 को मिला रोजगार, बढ़ेगी मजदूरों की संख्या

शिवपुरी।कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश भर में किए गए लॉकडाउन में बड़ी इंडस्ट्रीज के साथ गांव में होने वाले विकास कार्य भी ठप हो गए थे। जिसके चलते हर दिन कमाने वाले मजदूरों की आर्थिक स्थिति अधिक खराब हो गई। शिवपुरी जिले में 20 अप्रैल से लॉकडाउन में ढील दिए जाने के साथ ही ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार शुरू कर दिए गए। इन मजदूरों से जिले में जल संरक्षण के कार्य किए जाएंगे। जिले में मनरेगा के कुल डेढ़ लाख जॉबकार्डधारी मजदूर हैं, जिनमें से मंगलवार को दूसरे दिन तक 513 मजदूरों को काम पर लगा दिया गया। जिले के जॉबकार्डधारी मजदूरों को कोरोना से बचाव के लिए मास्क वितरित किए जाएंगे, जिसमें 22 लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा।

शिवपुरी जिले की 6 00 ग्राम पंचायतों में एक्टिव जॉबकार्डधारी मजदूरों की संख्या 1.50 लाख है। इन्हें 190 रुपए प्रतिदिन के मान से सौ दिन का काम मनरेगा के तहत दिया जाता है। इस बार कोरोना के फेर में जिला ही नहीं देश भर में लॉक डाउन किए जाने से सभी तरह के रोजगार धंधे ठप हो गए। जिसके चलते शिवपुरी के मनरेगा मजदूरों को भी काम नहीं मिला तो वे भी घर में कैद होकर भूखों मरने की कगार पर जा पहुंचे। गांव में कोई काम न होने तथा जमा पूंजी भी महंगे रेट में राशन खरीदने में खत्म हो गई, ऐसे में इन मजदूर परिवार फांकाकशी की स्थिति में जा पहुंचे। मजदूर व गरीब परिवारों को तीन माह राशन कंट्रोल की दुकानों से उपलब्ध कराए जाने के निर्देश भी जारी हुए, लेकिन अधिकांश ग्रामों में एक या दो माह का राशन देकर इतिश्री कर ली गई। तेल-मसाले के लिए पैसा न होने की वजह से इन मजदूर परिवारों की परेशानी इस लॉक डाउन में बढ़ गई थी। मजदूरों की इस समस्या को देखते हुए शासन ने 20 अप्रैल से मनरेगा के काम शुरू कर दिए गए।

जल संरक्षण के कराए जाएंगे काम
मनरेगा के तहत पिछले लंबित कार्यों को तो पूरा किया ही जाएगा, लेकिन विशेष फोकस जल संरक्षण के कार्यों पर रहेगा। जिसमें पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार, नए तालाब बनाने के अलावा मेढ़ बंधान, कंटूर ट्रेंच का काम किया जाएगा। चूंकि अब गर्मी के बाद बारिश शुरू होगी, तो इन जल संरचनाओं के बनने से गांव में जल संरक्षित होने से वहां का वाटर लेबल भी बढ़ेगा। एक तरफ जहां ग्रामों का वाटर लेबल बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर मनरेगा में काम मिलने से मजदूरों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

प्रति मजदूर 19 हजार रुपए मिलेंगे
जिले में मनरेगा के मजदूरों को सौ दिन का काम यानि 190 रुपए के हिसाब से प्रति मजदूर को 19 हजार रुपए की राशि मजदूरी के रूप में मिलेगी। जिससे मजदूर परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा तथा लॉकडाउन के फेर में हुई नुकसान की कुछ भरपाई हो पाएगी। इनमें से कई मजदूर तो ऐसे हैं, जो बाहर काम करने गए थे, लेकिन वहां भी उन्हें मजदूरी नहीं मिल पाई तथा वे अधूरा काम छोडकऱ वापस आ गए। ऐसे में यह परिवार बेहद गरीबी में गुजार रहे थे, जिन्हें बड़ी राहत मिलेगी।

पांच जनपदों में शुरू हुआ काम
मनरेगा में अभी तक शिवपुरी जनपद सहित पांच जनपदों में काम शुरू हुआ है। जिसमें बदरवास में 54, खनियांधाना में 331, नरवर में 8 8 , शिवपुरी में 39 व पोहरी में 1 मजदूर को मनरेगा में काम मिल चुका है। जबकि कोलारस, करैरा व पिछोर जनपद में अभी तक मनरेगा के मजदूरों को काम नहीं मिला। मंगलवार को 513 मजदूरों ने मनरेगा में दूसरे दिन काम किया। जनपदों से लिस्ट आने के बाद अन्य मजदूरों को काम मिलेगा।

नरेगा के तहत जिले में जल संरक्षण के काम किए जाएंगे। जिसमें पुराने तालाब का जीर्णोद्धार, मेढ़ बंधान, कंटूर ट्रंच, के अलावा नए तालाब भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा गांव में यदि मुरम-मिट्टी की अधूरी सडक़ों के लंबित कामों को पूरा करेंगे।
एचपी वर्मा, सीईओ जिला पंचायत शिवपुरी