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मजदूरी में मिली आलू की बोरियों के नीचे दबने से बेटी की मौत

अमोला निवासी उस मजदूर दंपती की जो धौलपुर में दो माह पहले आलू खोदने की मजदूरी करने गए थे और होली पर घर लौटते समय मजदूरी के रूप में नकदी व आलू के बोरे लेकर लौटे थे और इन बोरियों को नीचे दबकर उनकी बेटी की मौत हो गई।

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मजदूरी में मिली आलू की बोरियों के नीचे दबने से बेटी की मौत

मजदूरी में मिली आलू की बोरियों के नीचे दबने से बेटी की मौत

अमोला/शिवपुरी . मजदूर दंपती की बेटी की जान उन आलू के बोरों ने ले ली, जिन्हें वे मजदूरी करने के बाद लेकर आए थे। अपने कलेजे का टुकड़ा व इकलौती बेटी गंवाने वाले मजदूर दंपती का अब रो-रोकर बुरा हाल है और वे बार-बार यही कह रहे हैं कि हमारी मति मारी गई थी कि नकदी के साथ मजदूरी में आलू के बोरे लेकर आए। यदि इन बोरों को लेकर नहीं आते, तो आज हमारी बेटी हमारे साथ होती। ये व्यथा है अमोला निवासी उस मजदूर दंपती की जो धौलपुर में दो माह पहले आलू खोदने की मजदूरी करने गए थे और होली पर घर लौटते समय मजदूरी के रूप में नकदी व आलू के बोरे लेकर लौटे थे और इन बोरियों को नीचे दबकर उनकी बेटी की मौत हो गई। इस मजदूर परिवार की होली त्योहार की खुशियां बेटी की मौत के साथ ही गम में बदल गईं।

अमोला क्रमांक-एक में रहने वाला नवल आदिवासी दो माह पहले अपनी पत्नी ज्योति व ढाई साल की इकलौती बेटी वंदना को लेकर आगरा-धौलपुर में आलू खोदने गया था। उसे मजदूरी में रुपए मिलने के साथ ही 50-50 किलो आलू के तीन बोरे भी मिले थे, जिन्हें लेकर यह परिवार 21 मार्च को ही अपने घर वापस आया था। नवल ने अपने घर की एक गोख में आलू की बोरियां रखी हुईं थीं, जो आधी बाहर की ओर लटकी थीं। नवल आदिवासी ने बताया कि होली की तैयारियों के चलते शुक्रवार की सुबह 11 बजे मैं बाजार गया था और मेरी पत्नी घर का आंगन लीप रही थी। वहीं पास में ढाई साल की मासूम बिटिया वंदना भी खेल रही थी। नवल ने बताया कि बच्ची के ऊपर बोरी कुछ ऐसी गिरी कि उसके मुंह से चीख तक नहीं निकली और मेरी पत्नी को कुछ पता ही नहीं चला।

बेटी बोरी के नीचे दबी, मां गांव में ढूंढ रही
नवल ने बताया कि मैं जब राशन लेकर वापस घर आया तो पत्नी बेटी को आवाज लगा रही थी, लेकिन जब घर में बेटी नजर नहीं आई तो फिर गांव में ढूंढने के लिए गई, लेकिन इधर-उधर ढूंढने के बाद भी जब बेटी नहीं मिली तो नवल की पत्नी वापस घर आ गई। इसी बीच उसकी नजर बोरी के बीच फंसी बेटी की फ्रॉक पर गई, तो उसने सोचा कि फ्रॉक दबी है, लेकिन जब उसे खींचा तो बेटी की लाश निकली। पति-पत्नी अपनी इकलौती बेटी को गोद में लेकर दहाड़ मार-मार कर रोने लगे। क्योंकि उनके घर की रौनक बिटिया वंदना उनकी गोद में मृत पड़ी थी।

हमारा तो सब कुछ लुट गया
आगरा-धौलपुर से मजदूरी करके लौटने के बाद हम अपने छोटे से परिवार के साथ जोर-शोर से होली मनाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन हमें क्या पता था कि हमारी बिटिया हमसे इतनी दूर चली जाएगी। हमारा तो सब कुछ लुट गया, अब मैं अपनी पत्नी को भी नहीं समझा पा रहा, क्योंकि उसकी हालत बहुत खराब है।