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बगैर बताए स्ट्रेचर पर प्रसूता का शव छोड़ गए, नर्स को लात-घूंसों से पीटा

जिला अस्पताल में हंगामा, नर्सिंग स्टॉफ ने शुरू की काम बंद हड़ताल

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शिवपुरी. जिला अस्पताल में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात एक प्रसूता की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने जमकर हंगामा कर किया। नर्सों के साथ लात-घूंसों से मारपीट की। घटना से गुस्साईं नर्सों ने मंगलवार को काम बंद हड़ताल कर दी और कोतवाली पहुंचकर घटना की एफआइआर दर्ज कराई। इतना ही नहीं मारपीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कलेक्टे्रट पहुंचकर जिला पंचायत सीइओ को भी ज्ञापन सौंपा। इधर जब दूसरे पक्ष को एफआइआर दर्ज होने का पता चला तो वे भी प्रसूता का शव लेकर कोतवाली पहुंचे और आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। पूरे घटनाक्रम के बीच वह मासूम गर्म कपड़ों में लिपटी रही, जिसके जन्म के बाद उसकी मां दुनिया छोड़ गई।

जानकारी के अनुसार नीलगर चौराहा पुरानी शिवपुरी निवासी फरजाना शेख को प्रसव पीड़ा होने पर 2 जनवरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उसने 3 जनवरी को ऑपरेशन से एक बेटी को जन्म दिया। प्रसव के बाद फरजाना की हालत बिगडऩे लगी और कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। सोमवार रात जब फरजाना के परिजनों को पता चला कि उसकी मौत हो गई, तो फिर उन्होंने ड्यूटी नर्स के साथ लात-घूंसों से मारपीट कर दी। रात में नर्सों के साथ हुई मारपीट के विरोध में मंगलवार सुबह नर्सों ने काम बंद हड़ताल कर दी। सभी नर्स कोतवाली पहुुचीं और मारपीट की घटना की एफआइआर दर्ज कराने की मांग की। कोतवाली पुलिस ने एएनएम प्रियंकाराजे और शिवानी की रिपोर्ट पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया। नर्सों ने स्टाफ के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला पंचायत सीइओ एचपी वर्मा को ज्ञापन सौंपकर मारपीट और हंगामा करने वाले लोगों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्यवाही की मांग की।

शव लेकर कोतवाली पहुंचे परिजन: दोपहर में मृतका फरजाना के परिजन और रिश्तेदार उसका शव लेकर कोतवाली पहुंचे। उनका आरोप था कि फरजाना की जब तबियत बिगड़ रही थी, तब हम ड्यूटी नर्स सहित अन्य स्टाफ के सामने गिड़गिड़ाए, लेकिन किसी ने नहीं सुनी और उनकी लापरवाही के चलते फरजाना यह दुनिया छोड़ गई। फरजाना के पिता अनवर शेख ने कहा कि हमने किसी के साथ कोई मारपीट नहीं की, लेकिन अस्पताल का स्टाफ नाकामियों को छुपाने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है।
अस्पताल में सिक्यूरिटी स्टॉफ तक नहीं था

परिजनों का आरोप: हालत बिगड़ रही थी, कोई देखने तक को तैयार नहीं था
फरजाना के परिजनों का कहना था कि जब महिला की हालत बिगड़ रही थी, तो उन्होंने ड्यूटी नर्स से लेकर सभी जिम्मेदारों से कहा कि उसे एक बार देख लो, लेकिन उन्होंने लापरवाही करते हुए उसे देखा तक नहीं। इतना ही नहीं जब फरजाना की मौत हो गई, तो उसके शव को स्ट्रैचर पर छोड़कर स्टाफ के लोग अपने कक्षों में जाकर बैठ गए। हमें बताया तक नहीं।

प्रबंधन का तर्क: मारपीट शुरू की, डॉक्टर जान बचाने छिपते रहे
प्रसूता वार्ड में ड्यूटी पर तैनात एएनएम प्रियंकाराजे यादव और शिवानी मोहिते ने कहा कि डॉक्टर के बताए अनुसार प्रसूता का ट्रीटमेंट किया, लेकिन उसकी जान चली गई, रात में जब हम मरीजों को देख रहे थे, तभी फरजाना के परिजनों ने हमारे साथ अभद्रता करते हुए लात-घूंसों से मारपीट कर दी। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर भी इधर-उधर भागकर छुपते रहे।