
अब बंद हो गया हुक्का-चिलम, ताश के पत्ते
शिवपुरी/करैरा। कोरोना का असर शहरी क्षेत्रों में कुछ खास बदलाव भले ही न हुआ हो, लेकिन गांव में इससे कुछ अच्छे बदलाव नजर आने लगे हैं। शासन के नियमों का पालन करने के फेर में ग्रामीण न केवल दूरी बनाकर बैठने लगे, वहीं चौपाल में बैठकर ताश पत्ते या हुक्का चिलम पीने वाले भी अब नजर नहीं आ रहे। इस बहाने कई लोग व्यसन से दूर होते जा रहे हैं।
गांव के लोग अपना समय गुजारने के लिए जब दुकान आदि के बाहर भी बैठते हैं, तो वे सोशल डिस्टेंस का पूरा ध्यान रखकर दूरी बनाने के साथ ही मुंह पर कपड़ा ढांके रहते हैं। गांव की दुकान के बाहर दूरी बनाकर कुर्सियों पर बैठे लोगों का कहना था कि पहले तो चौपाल पर 20-25 लोग एक साथ बैठकर कई घंटों तक बातें किया करते थे, लेकिन जबसे कोरोना वायरस आया है, तब से चौपाल ही सूनी हो गई।
अब लोग अपने घरों में ही रहते हैं और यदि बैठना भी होता है, तो दूरी बनाकर चेहरे पर मास्क या कपड़ा लगाकर बैठते हैं। उनका कहना है कि हमें बीमारी से डर नहीं है, लेकिन हम शासन के नियमों का पालन कर रहे हैं।
गलत काम भी हो रहे बंद
ग्रामीणों का कहना था कि जब चौपाल में घंटों बैठते थे, तो वहीं पर हुक्का-चिलम चलती रहती थी, कुछ लोग ताश पत्तों से जुआ आदि भी खेलते थे, लेकिन जबसे कोरोना चला है, तबसे यह सभी गलत काम भी बंद हो गए, क्योंकि अब घर से बाहर एक जगह पर अधिक लोग इकट्ठा नहीं हो सकते। सभी लोग अपने घरों में हैं और घर में रहते हुए यह सब काम नहीं होते।
अब नहीं जाएंगे गांव छोड़कर
गांव में कुछ लोग बाहर काम करने जाते थे, लेकिन इस बार कोरोना के चलते देश भर में जब लॉकडाउन किया गया, तो बाहर गए लोग फंस कर रह गए। वे किसी तरह अपनी जान सलामती से वापस अपने गांव आ सके, इस दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ीं। इसलिए अब वे यही कह रहे हैं कि काम करेंगे तो अपने गांव में ही, ताकि फिर कभी कोई ऐसी बीमारी आई, तो कम से कम घर में ही रहेंगे।
यह बोले ग्रामीण : बंद हो गया हुक्का चिलम
पहले चौपाल में बहुत समय तक बैठते थे, जहां पर कुछ लोग हुक्का चिलम भी पीते थे, ताश के पत्ते फेंटते थे, लेकिन कोरोना के चलते अब चौपाल सूनी हुई तो यह सब काम भी बंद हो गए। अब तो हम शासन के नियमों का पालन कर रहे हैं।
- अखैराज लोधी, सिल्लारपुर
अब कहीं नहीं जा पा रहे
पहले तो काम करने के लिए गांव के आसपास भी चले जाते थे, लेकिन इस बीमारी ने हमें घर में ही कैद करके रख दिया है। अभी तक तो गांव में सभी लोग ठीक हैं, लेकिन न जाने कब यह बीमारी जाएगी, ताकि हम पहले की तरह काम आदि के लिए घर से बाहर निकल सकेंगे।
- धनवंती लोधी, सिल्लारपुर
Published on:
21 Apr 2020 08:36 pm
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