
पीएस ने किया मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल का निरीक्षण
शिवपुरी. शहर में जुलाई माह से शुरू होने वाले मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं के साथ-साथ जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बीच समन्वय को लेकर गुरूवार की सुबह प्रमुख सचिव मेडिकल एजूकेशन ने एक महत्वपूर्ण दौरा कर बिल्डिंग का निरीक्षण किया व सीएस सहित मेडिकल कॉलेज की डीन को आपसी समन्वय का पाठ पढ़ाया।
उल्लेखनीय है कि शिवपुरी मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस की १०० सीटों पर पढ़ाई कराने की मान्यता एमसीआई से मिल चुकी है और जुलाई माह से यहां क्लासेस भी शुरू हो जाएंगी। इसी के चलते गुरुवार को व्यवस्थाओं का जायजा लेने मप्र मेडिकल एजूकेशन के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। जिला अस्पताल में कलेक्टर अनुग्रहा पी, सीएमएचओ डॉ एएल शर्मा, मेडिकल कॉलेज डीन इला गुजरिया, जिला अस्पताल अधीक्षक डॉ गोविंद सिंह के साथ महत्वपूर्ण बैठक की और दोनों बॉडीज (मेडिकल कॉलेज-जिला अस्पताल) के बीच विभिन्न मुद्दों पर चल रही आपसी खींचतान पर आपसी समन्वय बनाने की सीख दी। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज चालू होने के बाद जिला अस्पताल ही मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हॉस्पिटल का काम करेगा, ऐसे में दोनों के बीच बढिय़ा समन्वय रहे और शहर सहित आसपास के गांव व जिलों से आने वाले लोगों को यहां समुचित व्यवस्थाएं मिलें। मेडिकल कॉलेज में जो स्पेशलिस्ट डॉक्टर आए हैं उनके ज्ञान का लाभ आम जनता को मिल सके, इसके लिए समन्वय बैठक की गई थी। इसके अलावा जो कमियां सिस्टम में रह गई हैं उसको अगले डेढ़ महीने में पूरा किया जाना है। बकौल पीएस मेडीकल कॉलेज के चालू होते ही यहां पर मिलने वाली दवाओं की क्वालिटी में सुधार होगा, लोगों को और बेहतर ऑपरेशन की सुविधाएं देनी पड़ेंगी। इसके लिए फंड की जरूरत होगी, वह कहां से और कैसे अरेंज करेंगे। क्या कार्ययोजना तैयार की जाएगी, इसी विषय में बैठक में चर्चा की गई।
मेडिकल कॉलेज भर्ती घोटाले पर साधी चुप्पी
मेडिकल कॉलेज में हुई विभिन्न पदों की भर्ती के संबंध में विधानसभा से गठित कमेटी द्वारा की जा रही जांच के विषय में जब पीएस एसएस शुक्ला से सवाल किया गया तो वह पूरी तरह से शांत रह गए और उन्होंने यह कहते हुए बात टाल दी कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनके इस जवाब से और विवादों के बीच चयनित हुए अभ्यर्थियों की लगातार होती जा रही ज्वाइनिंग से यह प्रतीत हो रहा है कि मेडिकल कॉलेज भर्ती घोटाले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और पात्र अभ्यर्थियों को न्याय मिलना असंभव है। इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ की भर्ती के संबंध में तथा इंचार्ज नर्सिंग स्टाफ का वेतन न मिलने के विषय में भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
Published on:
31 May 2019 07:02 am

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