
शिवपुरी. कोलारस उपचुनाव में आचार संहिता लगने के बाद वो रंगत खत्म हो गई, जो उससे पहले तक नजर आई। दोनों ही दल के प्रत्याशी अपने नेताओं के कंधे पर सवार हो गए हैं। कांगे्रस के महेंद्र यादव को जहां सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का इंतजार है, वहीं भाजपा के देवेंद्र जैन भी इस प्रयास में हैं कि यशोधरा राजे के सहारे उनकी नैया पार लग जाए। महत्वपूर्ण बात यह है कि अब विधानसभा क्षेत्र में वे कैबिनेट मंत्री भी नजर नहीं आ रहे, जो पिछले दिनों तक गांव-गांव घूमकर गलियों की खाक छान रहे थे।
भाजपा की ओर से नामांकन भरे जाने से पहले तक कोलारस का उपचुनाव शिवराज वर्सेस सिंधिया नजर आ रहा था, लेकिन यशोधरा राजे के एंट्री मारते ही यह चुनाव अब सिंधिया वर्सेस सिंधिया हो गया। हालांकि अभी सीएम की कई सभाएं वहां होनी हैं, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में जो मंत्री कोलारस क्षेत्र में डेरा डाले हुए थे, वे भी अब नजर नहीं आ रहे। उधर कांग्रेस प्रत्याशी बनने के बाद से राजनीति की एबीसीडी शुरू करने वाले महेंद्र यादव भी यदा-कदा ही ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क करते दिख रहे हैं, क्योंकि वे भी यह मानकर चल रहे हैं कि सांसद सिंधिया ने टिकट दिया है, तो वे ही नैया पार लगाएंगे।
भाजपा प्रत्याशी के लिए कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने शिवपुरी में डेरा डाल दिया और वे हर दिन सुबह शिवपुरी कत्था मिल से कोलारस निकल जाती हैं और देर शाम वापस शिवपुरी लौटती हैं। इस दौरान वे शहर में होने वाले शादी-समारोह में भी लोगों से मेल-मुलाकात कर रही हैं। सूत्रों की मानें तो उपचुनाव से संबंधित अपडेट भी सीएम को यशोधरा राजे ही दे रही हैं। यही वजह है कि दूसरे मंत्री व नेता अब क्षेत्र में नजर नहीं आ रहे, हालांकि पिछले दिनों में शादी-सहालग अधिक होने की वजह से नेताओं के उनमें शामिल होने की बात कही जा रही है। चूंकि सीएम भी अपनी सभा में यह कह चुके हैं कि अब यशोधरा राजे सिंधिया, कोलारस उपचुनाव करवाकर ही जाएंगी, इसलिए वेे शिवपुरी में ही टिक गईं।
अब परिवार सहित आ रहे सिंधिया
कोलारस उपचुनाव में भाजपा की ओर से अपने ही परिवार की बुआ के मोर्चा संभालने से अब सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी परिवार सहित डेरा डालने के मूड में हैं। 9 फरवरी से सांसद सिंधिया कोलारस क्षेत्र में आ रहे हैं और वे 21 फरवरी तक वहां रुकेंगे। इस दौरान उनकी पत्नी व बेटा भी चुनाव प्रचार की कमान संभालेंगे। इन हालातों के बीच जहां दोनों प्रत्याशी अपने स्तर पर उतने ही प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि उनके चुनाव की बागडोर तो एक ही परिवार के दो सदस्यों ने संभाल ली है।
Published on:
10 Feb 2018, 10:51 PM IST
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