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सीआईएटी में तैयार हुईं महिला कमांडो

आज के दौर में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं और यह नजर आया सीआईएटी (इंसरजेंसी एंड एंटी टेररिज्म स्कूल) में कमांडो ट्रेनिंग ले रहीं महिलाओं को देखकर, जिन्होंने सात सप्ताह तक हर तरह की कठिन ट्रेनिंग ली।

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सीआईएटी में तैयार हुईं महिला कमांडो

सीआईएटी में तैयार हुईं महिला कमांडो

शिवपुरी. आज के दौर में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं और यह नजर आया सीआईएटी (इंसरजेंसी एंड एंटी टेररिज्म स्कूल) में कमांडो ट्रेनिंग ले रहीं महिलाओं को देखकर, जिन्होंने सात सप्ताह तक हर तरह की कठिन ट्रेनिंग ली। इसमें उन्होंने दुश्मनों को पल भर में धूल चटाने के गुर सीखे। सीआईएटी में अभी तक 232 महिलाएं कमांडो ट्रेनिंग लेकर देश के विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा में तैनात हैं। पत्रिका ने जब ट्रेनिंग को कवर किया तो कमांडों ने ं हर कठिन ट्रेनिंग का डेमो दिखाने में बिना किसी डर और झिझक के आगे बढक़र उसे करके दिखाया।


देश के विभिन्न हिस्सों से कमांडो ट्रेनिंग लेने आईं 14 महिलाओं ने इतनी कठिन ट्रेनिंग ली, कि देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। लगभग ५० फीट की ऊंचाई से कमांडो चिल्लाते हुए जम्प की तो चंद सेकंड में ही वे ऊंचाई से नीचे आ गईं और फिर बिल्कुल स्टैंड पोजीशन में अगले स्टेप के लिए तैयार हो गईं। कंटीले तारों के नीचे से हथियार साथ में लेकर कोहनी के बल चलते हुए तेज रफ्तार में उसे पार करने के बाद फिर अगले स्टेप के लिए तैयार हो गईं। इस बार ट्रेनिंग में 14 महिलाएं शामिल हुईं, जबकि इससे पूर्व 100 महिलाओं की कंपनी ने एक साथ कमांडो ट्रेनिंग इस स्कूल से ली।

एक नजर में सीआईएटी
शिवपुरी सीआरपीएफ कैंप के पास ही 13 नवंबर 2009 को शिवपुरी सीआईएटी स्कूल की शुरुआत हुई। चूंकि शिवपुरी के आसपास का जंगल टे्रनिंग के लिए बेहतर है और इसमें कमांडो को नक्सली, उग्रवादी व आतंकवादियों से लडऩे की कठिन ट्रेनिंग दी जाती है। जबसे यह स्कूल शुरू हुआ है, यहां कमांडो ट्रेनिंग लगातार चलती रहती है। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले महिला-पुरुष इस कठिन टे्रनिंग को करने के बाद किसी भी परिस्थिति से जूझने के लिए तैयार किए जाते हैं।

आधुनिक हथियारों में भी निपुण
सी आईएटी में कमांडो ट्रेनिंग ले रहीं महिलाओं ने यहां केवल फिजिकल टेस्ट ही पार नहीं किए, बल्कि आधुनिक हथियारों को चलाने एवं उन्हें लोड-अनलोड करने की भी ट्रेनिंग ली। एलएमजी, एके-45, इनसास, लाइट मशीनगन, रॉकेट लांचर जैसे भारी-भरकम हथियारों को कंधे पर लेकर वे तुरंत पोजीशन में आकर दुश्मन को नेस्तनाबूद करने को तैयार हो गईं। इन हथियारों को सिर्फ चलाने की ही नहीं बल्कि उन्हें अलग-अलग पार्ट्स में खोलकर उसे पुन: जोडऩे की ट्रेनिंग भी दी गई। फिजिकल फिटनेस के अलावा हथियारों में दक्ष हो चुकीं इन महिला कमांडों से जब बात की तो उन्होंने कहा कि अब हम देश की सेवा के लिए किसी भी क्षेत्र में दुश्मन को पूरी तरह से तबाह करने के लिए तैयार हैं।

रस्सी के सहारे तय की लंबी दूरी : महिला कमांडो की ट्रेनिंग के दौरान महिलाओं ने रस्सी के सहारे हवा में रहते हुए लंबी दूरी तय करके भी दिखाया। यह ट्रेनिंग उन परिस्थितियों में काम आती है, जब नीचे नाला या नदी का बहाव अथवा कोई गहरी खाई को पार करना हो। सीआईएटी कैंपस में जब इन रस्सियों के पास महिला कमांडो पहुंचीं तो देखते ही देखते उन्होंने पोजीशन बनाई और चंद मिनट में ही उन्होंने हवा में ही लंबी दूरी तय कर ली।

यह बोलीं महिला कमांडो
समाज में महिलाओं को कमजोर दृष्टि से देखा जाता है, लेकिन हम जैसी दूसरी कई महिलाओं ने एक बार नहीं बल्कि कई बार यह करके दिखाया है कि हम किसी से कम नहीं। हम यहां कमांडो टे्रनिंग लेकर अब पूरी तरह से तैयार हैं और दुश्मन को चंद मिनटों में धूल चटवा देंगे। ट्रेनिंग के दौरान शुरुआत में तो घर-परिवार की याद आई, लेकिन जब एक बार देश की सेवा के लिए खुद को समर्पित किया तो कठिन से कठिन ट्रेनिंग आसान हो गई। -लक्ष्मी जाट, कमांडो ट्रेनीज सीआईएटी शिवपुरी