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अखिलेश के ड्रीम प्राजेक्ट पर योगी सरकार ने लगाई रोक

: भौतिक सत्यापन के बाद विवि के भवनों के निर्माण को मिलेगा धन

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cm yogi-akhilesh yadav

अखिलेश के ड्रीम प्राजेक्ट पर सरकार ने लगाई रोक

सिद्धार्थनगर. भारत नेपाल सीमा पर स्थित कपिलवस्तु में निर्माणाधीन सपा सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट सिद्धार्थ विश्वविद्यालय पर भी योगी सरकार की भृकुटि तन गई है। सरकार ने विवि को जारी होने वाले धन पर रोक लगा दी है।
साथ ही अब तक खर्च हुए 152 करोड़ रूपए से कराए गए कार्यों के भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

जिसको लेकर विवि प्रशासन के साथ ही कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम भी सकते में है। कार्य के भौतिक सत्यापन के बाद ही सरकार धन रिलीज करेगी। योगी सरकार ने विवि को रिलीज होने वाले 20 करोड़ रूपए पर भी रोक लगा दी है। शासन के इस फरमान से सिद्धार्थ विवि को बड़ा को झटका लगा है।

शासन के नए फरमान के बाद अधर में लटके कई भवनों के निर्माण पर भी ग्रहण लग गया है। भारत नेपाल सीमा पर स्थित गौतम बुद्ध की क्रीड़ा स्थली के विकास को ध्यान में रखकर यहां पर पूर्व विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय की पहल पर सिद्धार्थ विवि की स्थापना की गई। जिसकी नींव स्वयं तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रखते हुए अपनी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया था। 450 करोड़ रूपए के ड्रीम प्रोजेक्ट को अपने ही शासनकाल में पूरा करने के लिए सपा सरकार ने पूरी ताकत लगाई। इसके लिए एक दो नहीं बल्कि चारशिफ्टों में रात दिन काम कराया जा रहा था। सपा सरकार ने दो किस्तों में 152 करोड़ रूपए अवमुक्त किए।

प्रशासनिक भवन के निर्माण के साथ ही कुलपति गेस्ट हाउस व अन्य भवनों के निर्माण के बाद आनन फानन में विवि का संचालन शुरू करा दिया गया। इसके बाद सपा की सरकार जाने के बाद विवि के कई भवनों का निर्माण अधर में लटक गया। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद विवि के
निर्माण पर ग्रहण लग गया। विवि के भवनों का निर्माण करा रही राजकीय निर्माण निगम संस्थाा द्वारा अधूरे भवनों का निर्माण पूरा करने के लिए सरकार ने धन की मांग की गई तो सरकार ने पूर्व में हुए कार्यों के भौतिक सत्यापन का आदेश देकर कार्यदायी संस्था के साथ विवि प्रशासन को सकते में डाल दिया। विवि के भवनों का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए साढे तीन सौ करोड़ रूपए की जरूरत है। विवि के भवनों के निर्माण के लिए रिलीज होने वाले 20 करोड़ रूपए पर भाजपा सरकार ने रोक लगा दी है। साथ ही विवि प्रशासन को पत्र लिखकर 152 करोड़ के खर्च का ब्यौरा मांगा है। जिसके सम्बंध में विवि प्रशासन ने राजकीय निर्माण निगम से खर्च का ब्यौरा तलब किया है। जिसके चलते विवि के भवनों का निर्माण लम्बे समय तक लटके रहने की आशंका जताई जा रही है।


30 अक्टूबर को अखिलेश यादव ने रखी की विवि की नींव कपिलवस्तु में निर्माणाधीन सिद्धार्थ विवि के निर्माण की नींव तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 30 अक्टूबर 2013 को रखी थी। मई 2014 से विवि के भवनों का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। प्रशासनिक भवन का निर्माण पूरा होने के साथ ही अखिलेश यादव ने विवि का औपचारिक लोकापर्ण किया जिसके बाद यहां पर 17 जून 2015 से वाणिज्य विषय की कक्षाएं भी शुरू हो गई। लेकिन अभी तक छात्रावास, कैन्टीन सहित अन्य भवनों का निर्माण अभी भी अधूरा है। ऐसे में भवनों का निर्माण नहीं होने से यहां के शिक्षकों के साथ ही अन्य लोगों को भी दुश्वारियां झेलनी पड़ती है।

input- सूरज सिंह

राजकीय निर्माण निगम की दो इकाईयां करा रही थी निर्माण

विवि के भवनों का निर्माण कार्य समय से पूरा हो जाय इसके लिए सपा सरकार का दबाब बढ़ने पर राजकीय निर्माण निगम की दो इकाइयों को अलग-अलग कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निगम की फैजाबाद इकाई के साथ ही गोरखपुर इकाई को भी लगाया गया था। ऐसे में दोनों इकाईयों द्वारा कराए गए अलग-अलग कार्यों का ब्यौरा तलब करने के साथ ही उनके सम्बंधित पत्रावली जुटाने व उसकी जांच करने, भौतिक सत्यापन करने में विवि प्रशासन को काफी समय लगेगा। जिससे विवि के भवनों का निर्माण कार्य काफी समय तक लटक सकता है।

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