
integrated watershed management programme in sidhi
सीधी। आईडब्ल्यूएमपी योजना से जल संरक्षण के उद्देश्य से कराए गए निर्माण कार्य अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। जांच में अनियमितता की पुष्टि होने के बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई। वाटरशेड विकास परियोजना मझौली-3 की शिकायत पर कलेक्टर ने सहायक यंत्री एचआर कोष्ठी के नेतृत्व में चार सदस्यीय दल गठित कर जांच के निर्देश दिए थे। जांच टीम ने 17 दिसंबर 2016 को मौका मुआयना कर कार्यपालन यंत्री आरइएस को 11 अप्रैल 2017 को रिपोर्ट सौंपी गई।
बताया कि वाटरशेड विकास परियोजना मझौली-3 अंतर्गत धनौली, पोंड़ी, सेमरिहा, गड़ौर, पांड़, नेबूहा, बोदारी टोला, बड़काडोल, खमचौरा, बगइहा में 48 निर्माण कार्य कराए गए थे। इनमें से 36 निर्माण कार्य अनुपयोगी है। इतना ही नहीं निर्माण कार्य तकनीकी प्राकलन के अनुरूप नहीं किया जाना बताया गया है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को भी अनुपयोगी बताने के साथ निर्माण स्थल को अनुपयुक्त बताया है। लेकिन जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी महीनों बाद कार्रवाई न होना समझ से परे देखा जा रहा है।
दो वर्ष से चल रही जांच
वाटरशेड विकास परियोजना द्वारा कराए गए करोड़ों के निर्माण कार्य की शिकायत मिलने पर दो वर्ष पहले जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जा सकी है। दिसंबर 2016 में जांच दल ने उपयंत्री संतोष द्विवेदी व टीम लीडर आशीष सिंह बघेल की उपस्थिति में जांच की थी, किंतु रिकार्ड मिलने में देरी होने से जांच रिपोर्ट नहीं दी जा सकी थी। हालांकि, जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद 1६ अप्रैल 2017 को कार्यपालन यंत्री आरइएस ने जिला पंचायत सीइओ को रिपोर्ट सौंप दी है, इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई।
तकनीकी प्राकलन के अनुरूप नहीं हुए कार्य
वाटरशेड विकास परियोजना टीम अंतर्गत सर्वाधिक निर्माण कार्य धनौली, पोंड़ी, बड़काडोल में कराए गए हैं। यहां चेक डैम निर्माण के कार्य किए गए हैं। परियोजना अधिकारी की टीम ने न तो तकनीकी प्राकलन का ध्यान रखा और न ही निर्माण स्थल की उपयुक्तता पर गौर किया है। इसीलिए निर्माण कार्य अनुपयोगी पाए गए हैं। संरचना की भौतिक स्थिति भी काफी निराशाजनक देखी जा रही है।
ढाई करोड़ रूपए निर्माण कार्यों पर खर्च
बताया जाता है कि स्थल पर निरीक्षण करने के बाद कहीं से भी नहीं कहा जा सकता कि परियोजना द्वारा ढाई करोड़ रूपए निर्माण कार्यों पर खर्च किए गए हैं। दर्जन भर निर्माण कार्यों को उपयोगी पाया गया है तो शेष निर्माण कार्य केवल रूपए हजम करने के लिए कराए गए हैं। अहम बात यह कि कोई भी निर्माण कार्य तकनीकी प्राकलन के अनुसार होने चाहिए लेकिन यहां इसका ध्यान नहीं रखा गया है। सहायक यंत्री और उपयंत्रियों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लेख किया है।
नहीं मिला प्रतिवेदन
आइडब्ल्यूएमपी योजना के तहत कराए गए निर्माण का भौतिक सत्यापन कराया गया है। किंतु जांच दल ने प्रतिवेदन नहीं सौंपा। जिससे कार्रवाई नहीं की जा सकी है। जांच प्रतिवेदन के लिए पत्र लिखा गया है, मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
दीपक अहिरवार, तकनीकी विशेषज्ञ, आईडब्ल्यूएमपी परियोजना
Published on:
17 Jul 2018 04:47 pm
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