
Residents of more than half a dozen villages are imprisoned in the rai
सीधी। आजादी के सात दशक बाद भी जिले के आधा दर्जन गांव ऐसे हैं जहां के लोग बारिश के मौसम में चार महीनों तक गांव में कैद होकर रह जाते हैं। इस मौसम में यदि कोई गंभीर रूप से बीमार हुआ तो बाढ़ी नदी में नाव के सहारे नदी पार कर प्राथमिक स्वास्थ केंद्र के लिए करीब १२ किमी की दूरी तय करते हैं। वहीं आवश्यक सामग्री भी नाव के सहारे ही पार की जाती है। सोन एवं गोपद नदी से घिरे इन गांवों में रहवासी काफी परेशान हैं और वर्षों से नदी में पुल की मांग कर रहे हैं सोन नदी में सात वर्ष पूर्व पुल तो स्वीकृत की गई थी, तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा पुल निर्माण का शिलान्यास भी किया गया लेकिन आज तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया, जिससे यहां के रहवासी आज भी परेशान हैं।
ये हाल है सीधी जिले के सिहावल विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लौआर के कजरदह व बिछरी गांव का, यहां की आबादी करीब एक हजार है। यहां बुनियादी सुविधाओं के नाम पर केवल एक शासकीय व माध्यमिक शाला है। जबकि स्वास्थ सुविधा के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है। सीधी-सिंगरौली सीमा से जुड़े इन गांव से सिंगरौली जिले के भी करीब आधा दर्जन गांव जुड़े हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ तथा बाजार सुविधा के लिए भी सीधी जिले पर ही निर्भर हैं और यहां के रहवासी भी बारिश के चार महीनों में गांव में कै द होकर रह जाते हैं।
पुल स्वीकृत तो हुई पर नहीं हो पाया निर्माण-
सीधी-सिंगरौली जिले के इन गांवों को मुख्य धारा से जोडऩे के लिए सोन व गोपद नदी में पुल निर्माण की आवश्यकता है। जब तक इन नदियों में पुल निर्माण नहीं होता ग्रामीणों की समस्या बरकरार रहेगी। ग्रामीणों की लगातार मांग पर सोन नदी में पुल का निर्माण स्वीकृत किया गया। वर्ष 2012 में इस पुल का निर्माण बहरी में आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री मप्र शासन शिवराज सिंह द्वारा शिलान्यास भी कर दिया गया था, लेकिन आज तक पुलि का निर्माण नहीं हो पाया। जिम्मेदार अधिकारियों की बात माने तो पर्यावरण विभाग से एनओसी न मिल पाने के कारण अब तक पुल का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। वहीं दूसरे पुल की आवश्यकता लौआर से पैपखरा मार्ग में गोपद नदी पर है, इस पुल निर्माण की मांग भी ग्रामीणों द्वारा लगातार की जाती रही है, लोगों की मांग पर इस पुल निर्माण का भी प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक स्वीकृति न मिलने से पुल का निर्माण ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
बारिश के मौसम में जान जोखिम में डाल नाव से पार करते हैैं नदी-
कोई भी मौसम हो कजरदह, बिछरी सहित सिंगरौली जिले के सीमावर्ती आधा दर्जन गांवों के लोग वर्ष के बारह महीनों नदी पार कर बाजार-हाट करने व स्वास्थ सुविधा आदि का लाभ लेने जाते हैं। जब बारिश का मौसम आ जाता है, और नदी में पानी ज्यादा हो जाता है तो इन गांवों की एक हजार से अधिक आबादी गांव में कैद हो जाती है। अति आवश्यकता पडऩे पर ग्रामीणों को नाव के सहारे नदी पार करना पड़ता है। बाढ़ी नदी में छोटी नाव से नदी पार करते समय ग्रामीणों को जान हथेली पर रखना पड़ता है।
नजारा देख दहल जाता है दिल-
वर्तमान समय लगातार जारी बारिश के दौर के कारण सोन व गोपद दोनो नदियां उफान पर हैं। ऐसे मौसम में भी इन गांव के रहवासी बाजार हाट करने लौआर तथा स्वास्थ सुविधा लेने के लिए जिला मुख्यालय सहित बहरी बाजार आते हैं, ऐसे में जिस तरह ग्रामीण बाढ़ी नदी में छोटी नाव से सामग्री व बाइक आदि लेकर नदी पार करते हैं उस नजारे को देखकर लोगों का दिल दहल जाता है।
.......जब से हम लोग जानने लायक हुए हैं, तब से हाट बाजार करने व स्वास्थ सुविधा लेने के लिए नाव से सफर कर दूसरे गांव आना पड़ता है, जब तक पुल का निर्माण नहीं होगा, यह समस्या बरकरार रहेगी। हमें बारिश के मौसम मे नदी पार करने में काफी मुश्किल होती है, लेकिन मजबूरी में नदी पार करना ही पड़ता है।
मनसुखलाल सिंह, स्थानीय रहवासी
........पिछले पचास से अधिक वर्षो से नाव के सहारे ही नदी पार कर रहे हैं, तीन चार वर्ष पूर्व सुनने को मिला था कि पुल का निर्माण स्वीकृत हो गया है, लेकिन आज तक तो पुल निर्माण नहीं हो सका। हमे जान जोखिम में डालकर नदी पार करना पड़ता है, बारिश के मौसम में जब नदी में ज्यादा पानी रहता है और कोई गंभीर बीमार हो जाता है तो अस्पताल ले जाने के लिए काफी दिक्कत होती है।
जानकी प्रसाद दुबे, स्थानीय रहवासी
स्वीकृत है पुल निर्माण-
इन गांवों में पहुंचने के लिए सोन नदी पर पुल का निर्माण स्वीकृत है, पर्यावरण की एनओसी न मिल पाने के कारण पुल निर्माण नहीं हो पा रहा है, प्रयाश किया जाएगा की अतिशीघ्र एनओसी मिल जाए और पुल का निर्माण शुरू हो सके।
कमलेश्वर पटेल
मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मप्र शासन
Published on:
03 Oct 2019 08:38 pm

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