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50 बिस्तर के छात्रावास में रहते हैं 10 से 20 छात्र, फर्जी उपस्थिति के सहारे बजट का हो रहा बंंदरबांंट

मामला कुसमी अंचल में संचालित आदिवासी छात्रावासों का

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सीधी

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Suresh Mishra

Jan 10, 2020

Sidhi News: Story of Tribal hostels operated in kusmi zone

Sidhi News: Story of Tribal hostels operated in kusmi zone

सीधी/पथरौला/ जिले के आदिवासी बाहुल्य जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रावासों की हालत काफी दयनीय है। जनपद अंतर्गत दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में संचालित आश्रमों सहित छात्रावासों की हकीकत पर यदि गौर किया जाए तो आलम यह है कि पचास बिस्तर के अधिकांश छात्रावासों में महज 10 से 20 की संख्या में ही छात्र निवास करते हैं, जबकि यहां पदस्थ अधीक्षकों द्वारा फर्जी उपस्थिति के सहारे बजट का बंदरबांट किया जाता है। इसमें विभाग के आला अधिकारियों की भी भूमिका संदिग्ध नजर आती है।

ये है मामला
विगत दिवस ऐसा ही मामला जनपद अंतर्गत बालक छात्रावास बस्तुआ का प्रकाश में आया है। जहां निरीक्षण के दौरान 50 बिस्तर के छात्रावास में महज 12 छात्र उपस्थित पाए गए। पूछने पर छात्रों सहित उपस्थित भृत्य ने बताया कि छात्रावास में अधिकतम 20 छात्र ही रहते हैं, आज कुछ कम हैं। रजिस्टर में 48 छात्र दर्ज हैं। बताया गया कि अधीक्षक का आना जाना गृह ग्राम मड़वास से होता है। छात्रों के बिस्तर मे ठंडी से बचने के लिए पतले कंबल देखने को मिले।

एक शिक्षक को दो प्रभार
देखा जा रहा कि अधिकांश छात्रावासों का प्रभार ऐसे शिक्षकों को दिया गया है जिनके पास पूर्व से अन्य विद्यालयों के प्रभार है। जानकारों की बात पर गौर किया जाए तो छात्रावास में निवास करने वाले छात्रों की संख्या का सत्यापन विद्यालय के प्राचार्य द्वारा किया जाता है, लेकिन जब प्राचार्य और अधीक्षक पद एक ही व्यक्ति के पास हो तो बजट हजम करने का रास्ता आसानी से साफ हो जाता है।

पढ़ाई हो रही प्रभावित
एक ही शिक्षक के पास दो संस्थाओं का प्रभार होने के कारण शिक्षक कभी विद्यालय तो कभी छात्रावास संबंधित सरकारी कार्यों मे हमेशा व्यस्त रहते हैं। जिससे विद्यालय अतिथि शिक्षकों के भरोसे है।