
9 साल की उम्र में 16वीं भागवत कथा, मां की इच्छा बेटा ले सन्यास
16th Bhagwat Katha at the age of nine, mother's wish son to take sanyas सीकर. 9 वर्ष के जिस बालपन में बच्चे बॉलपेन चलाना सीखते हैं, उसमें वृंदावन निवासी बालसंत गोपीकृष्ण शरण महाराज भागवत कथा का वाचन कर रहे हैं। नेहरु पार्क के पास आयोजित महालक्ष्मी नृसिंह महायज्ञ में वे अपनी 16वीं कथा का वाचन कर रहे हैं। भगवद्भाव को देखते हुए उनकी मां भी गृहस्थ की बजाय उनके सन्यास जीवन की इच्छुक हैं। पत्रिका से खास बातचीत में उनके जीवन से संबंधित कई रहस्य खुले। पेश है गोपीकृष्ण शरण महाराज व उनके पिता संजीव कृष्ण की पत्रिका से विशेष बातचीत के अंश।
स. इस छोटी उम्र में भगवद् भाव का उदय और कथा वाचन कैसे संभव हुआ?
ज. होश संभालने के साथ भगवान में मन लगने लगा। साढ़े तीन वर्ष की उम्र में गुरुकुल गया। सात वर्ष की उम्र में मन में भागवत कथा करने की प्रेरणा हुई। वृंदावन में पहली कथा करने के बाद अब 16वीं कथा कर रहा हूं।
स. कौनसे गुरुकुल में पढ़ रहे हैं? और विषयों की शिक्षा भी ले रहे हैं?ज. वृंदावन में परमार्थ गुरुकुलम में पढ़ रहा हूं। इसके अलावा संस्कृत भी पढ़ रहा हूं। रुद्री, गृह शांति, दुर्गा सप्शती व भागवत मेरे प्रमुख विषय हैं। संगीत भी सीख रहा हूं।
स. क्या और बच्चों की तरह आप भी मोबाइल में गेम, कार्टून या खेलना पसंद करते हो?
ज. नहीं मैं ये नहीं करता। सिर्फ मोबाइल देखता हूं, पर उसमें भी भागवत कथा ही देखता व सुनता हूं। माता- पिता से निवेदन करूंगा कि वे बच्चों को धर्म की शिक्षा व संस्कार दें।
स. भागवत के अलावा भी कोई कथा करते हैं?
ज. अभी वेद व्याकरण पढ़ रहा हूं। इसलिए भागवत के अलावा कोई कथा नहीं करता।
स. मान्यता है कि गर्भ के समय मां के अध्ययन, कर्म, क्रियाएं व संस्कारों का असर बच्चों पर पड़ता है। क्या आपके केस में भी ऐसा है?
ज. हां। मेरी माताजी कृष्णा प्रिया किशोरी का भी भगवान में विशेष लगाव है। वह भी कथा करती है। पिता संजीव कृष्ण की भी रासलीला की मंडली है। दोनों का ही असर रहा है।
स. भविष्य के बारे में क्या सोचा है। गृहस्थ में प्रवेश करेंगे या सन्यास लेंगे।
ज. अभी नहीं सोचा है। माता सन्यास के बारे में कह चुकी है। पिता भी सहमत हैं। मेरा मन भी भगवान में है।
स. मोबाइल, टीवी व खेल में रहने वाले बच्चों को क्या संदेश देंगे?ज. थोड़ा खेलें। भगवान का भजन साथ करते रहें। बच्चों को रामनवमी सरीखे पर्वों व पूजन के बारे में भी पता होना चाहिए। इसके लिए माता- पिता की जिम्मेदारी है कि वे उन्हें बताएं।
पिता संजीव कृष्ण: ढाई साल की उम्र में फेरने लगे माला, जन्मदिन पर मांगी कथा
पिता संजीव कृष्ण ने बताया कि गोपीकृष्ण शरण ने ढाई साल की उम्र में अपने आप हाथ से माला फेरना शुरू कर दिया था। कोई साधु- संत भिक्षा के लिए आते तो वे दौडकऱ उनके पास पहुंचकर जिज्ञासु भाव से सवाल पूछते। भगवान के प्रति आस्था देख ही उनका प्रवेश गुरुकुल में करवाया गया। जब सातवें वर्ष में प्रवेश किया तो उन्होंने बेटे को उपहार देना तय किया। इसके लिए उन्होंने जब उनसे ही पसंदीदा उपहार के बारे में पूछा तो उन्होंने अपनी पहली भागवत कथा करने की इच्छा जताई। जिसे सुन उनकी आंखो में आंसु आ गए। उनकी इच्छा पूरी करवाते हुए वृंदावन में ही उनकी पहली कथा करवाई गई।
देखते ही गोद में बिठाकर दे दी दीक्षा
गोपीकृष्ण शरण महाराज की दीक्षा के बारे में संजीव कृष्ण ने बताया कि वे सलेमाबाद की निम्बार्क पीठ के पीठाधीश्वर श्यामशरण देवाचार्य महाराज के दर्शन करने गए थे। जहां उन्होंने गोपीकृष्ण शरण को देखते ही अपनी गोद में बिठा लिया और अपनी माला पहनाकर दीक्षा दे दी।
थाईलैंड में होगी अगली कथा
बालसंत गोपीशरण महाराज अपनी अगली कथा वृंदावन के अलावा थाईलैंड की विदेशी धरती पर भी होगी। वृंदावन में कथा एक अगस्त तथा थाईलैंड में 17 नवंबर से शुरू होगी।
Published on:
25 May 2023 11:54 am

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