सीकर. प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सियासी पारा अभी से गर्माने लगा है। लेकिन कांग्रेस की कार्यकारिणी अभी तक अनलॉक नहीं हो सकी है।
सीकर. प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सियासी पारा अभी से गर्माने लगा है। लेकिन कांग्रेस की कार्यकारिणी अभी तक अनलॉक नहीं हो सकी है। मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष व मंत्रियों की ओर से कार्यकर्ताओं से फ्लैगशिप योजनाओं को लेकर जनता के बीच में जाने का आह्मान किया जा रहा है। लेकिन अभी तक कई जिलों में तो जिलाध्यक्ष ही नियुक्त नहीं हुए है। जिन जिलों में जिलाध्यक्ष नियुक्त हो गए वहां अभी तक जिला कार्यकारिणी का गठन नहीं हुआ है। हालात यह है कि ब्लॉक कार्यकारिणी की सूचियां भी सियासत में उलझी हुई है। कार्यकारिणी गठित नहीं होने की वजह से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल भी कमजोर हो रहा है। दरअसल, प्रदेश में सियासी संग्राम के बाद कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया था। इसके बाद भी कांगे्रस अभी तक नियुक्ति की फाइल पटरी पर नहीं आ रही है। पिछले दिनों कांग्रेस को नया अध्यक्ष बनने के बाद कार्यकर्ताओं की उम्मीद जगी, लेकिन राहुल गांधी की यात्रा और दो राज्यों के विधानसभा चुनाव की वजह से मामला फिर से अटक गया है।
योजनाओं को कौन लेकर जाए धरातल पर
कांग्रेस में लगातार सक्रिय रहकर बूथ के चुनाव मैनेजमैट से लेकर विपक्ष को घेरने के मामले में सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ताओं में अब तक कार्यकारिणी गठन नहीं होने से मायूसी है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सत्ता के समय संगठन में काम करने का एक अलग अनुभव होता है। चुनाव के समय के लिए नई टीम भी तैयार होती है। ऐसे में अब चुनावी साल में योजनाओं को धरातल पर ले जाना अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती रहेगी।
तालमेल का अभाव
कांग्रेस विधायक सहित अन्य पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा के बाद जिलाध्यक्ष के नाम तय होने है। लेकिन आठ जिलों में विधायकों के आपसी तालमेल नहीं बैठने की वजह से नियुक्ति नहीं हो सकी। अभी तक 13 जिलों में ही जिलाध्यक्ष नियुक्त हुए है।
दिल्ली में अटकी सूची
कांग्रेस की कार्यकारिणी गठन नहीं होने के पीछे वजह दिल्ली व जयपुर से सूचियों को हरी झंडी नहीं मिलना भी है। प्रभारी के सक्रिय नहीं होने की वजह से पेंच फंस गया है। हालांकि पिछले दिनों प्रदेश अध्यक्ष ने जल्द सूचियों के अनलॉक होने का दावा किया था।
पहले सियासी संग्राम से देरी
कांग्रेस के सत्ता में आने के साथ ही सियासी संग्राम शुरू हो गया। इस वजह से सरकार के चार साल पूरे होने के बाद भी कांग्रेस की प्रदेशभर में कार्यकारिणी नहीं बन सकी है।
इसलिए कार्यकारिणी का बढ़ रहा इंतजार
1. मिशन 2023: कांग्रेस की ओर से मिशन 2023 के लिए लगतार तैयारी तेज करने का दावा किया जा रहा है। लेकिन अभी तक जिलों में संगठन का ढांचा ही पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं को भी मिशन 2023 के लिए कार्यकारिणी की सूची के अनलॉक होने का इंतजार है।
2. सरकार की योजनाओं की मार्केटिंग: खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और गोविन्द सिंह डोटासरा कई बार सभाओं में कह चुके है कि उनकी सरकार भाजपा से कई गुणा बेहतर काम कर रही है। लेकिन मार्केटिंग में हम कमजोर है। ऐसे में अब कार्यकारिणी और कई जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर इस महीने से तैयारी तेज होने की संभावना है।