
फतेहपुर.
किसानों को सरकार ने जिस तरह से बांटने की कोशिश कर भेदभाव किया है। मंगलवार को फतेहपुर विधायक नंदकिशोर महरिया ने विधानसभा में प्रश्न के जवाब में जानकारी मांगी। किसानों की कर्जामाफी व न्यूनतम समर्थन मूल्य के संबंध में महिरया ने प्रश्न पूछा कि प्रदेश में किसानों का ऋण माफ करने के लिए सरकार की ओर से कमेटी का गठन कब किया गया व कमेटी की ओर से अब तक क्या-क्या रिपोर्ट प्रेषित की गई। इस संबंध में सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। महरिया ने किसानों के सम्पूर्ण कर्जा माफी करने का प्रश्न पूछा इस संबंध में मंत्री ने कहा कि किसानों का जो कर्जा माफ किया है ऐसा राजस्थान में पहली बार हुआ हैं। महरिया ने कहा कि कर्जा माफी के नाम पर सरकार ने किसानों को अलग अलग हिस्सों में बांट दिया है। जिस किसान ने अन्य राष्ट्रीय बैंक से ऋण लिया है उसने कोई गुनाह किया है कि उसका कर्जा माफ नहीं किया गया। कई तरह के राइडर लगा दिए। ऐसे में किसान को गुमराह किया जा रहा है। महरिया ने कहा कि कमेटी ने इतने दिन क्या कार्रवाई की यह बताने में कहा परेशानी है। महरिया ने कहा कि प्रदेश में 68 लाख जोत है। संसद में पेश रिपोर्ट के हिसाब से एक किसान परिवार पर 70500 रुपए का कर्ज है। सरकार ने आठ हजार करोड़ रुपए का कर्जा व पेन्लटी माफ करने की बात कही है। जिसमें अधिकतर पैसा तो ब्याज व शास्ती में चला जाएगा। मूल पैसा तो कुछ मात्र किसानों का ही माफ होगा। यह उंट के मुंह में जीरे के समान है।
जब शामिल नहीं कर सकते तो घोषणा ही क्यों की
महरिया ने कहा कि सुराज संकल्प पत्र में सरकार ने कई फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य में शामिल करने की घोषणा की थी। अब सरकार कह रही है कि यह भारत सरकार के स्तर का मामला है हमनें तीन बार इस संबंध में पत्र भेजे है। इस पर महरिया ने कहा कि जब आप शामिल नहीं कर सकते हो तो फिर घोषणा करके किसानों को गुमराह क्यों किया।
Published on:
21 Feb 2018 02:20 pm
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