बेबस मन और आंखों से बहते आंसू। मिन्नतें करते हाथ और पैरों में घिसी हुई चप्पल। कुछ ऐसे ही हाल-बेहाल बने हुए हैं एक लाचार पिता के जो, पिछले सवा दो महीने से अपनी मासूम लाडो को दर-दर खोजता फिर रहा है। बानगी यह है कि बेटी को तलाशने में घर तक छूट गया है। बेटी की तलाश के लिए यह बेबस पिता थानेदार से लेकर डीजीपी तक चक्कर काट चुका है। लेकिन, लापता बेटी का सुराग नहीं लगने पर विश्वास टूटने लगा है और बूढें पांव भी जवाब देने लगे हैं।