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मां ने बेटे को अंतिम बार दुलारा तो भर आई आंखें

शहीद रामनिवास यादव (52) को हजारों लोगों ने नम आंखों से भारत माता के जयघोष के साथ अंतिम विदाई दी।

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funeral of martyr ASI ramniwas in native village dabala neem ka thana

मां ने बेटे को अंतिम बार दुलारा तो भर आई आंखें

नीमकाथाना/मावंडा.

जम्मू कश्मीर में सांवा सेक्टर की चमलियाल पोस्ट पर बुधवार को पाकिस्तान के हमले में शहीद हुए डाबला के बानावाली ढाणी के लाडले शहीद रामनिवास यादव (52) को हजारों लोगों ने नम आंखों से भारत माता के जयघोष के साथ अंतिम विदाई दी। गुरुवार को शहीद का राजकीय सम्मान से उनके पैतृक गांव ढाणी बानावाली में अंतिम संस्कार किया गया। सुबह पाटन थाने में पहुंची शहीद की पार्थिव देह को उनके गांव ले जाया गया। एनडीआरएफ में तैनात बेटे अजय ने अपने पिता शहीद रामनिवास यादव की चिता को मुखाग्नि दी। बीएसएफ व पुलिस के जवानों की ओर से शहीद यादव को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। शहीद की अंतिम यात्रा से पहले सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष व विधायक प्रेमसिंह बाजौर, सांसद सुमेधानंद सरस्वती, पाटन प्रधान संतोष गुर्जर, प्रतिपक्ष नेता महेन्द्र गोयल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष पीएस जाट, जिला कलक्टर नरेश कुमार ठकराल, पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार,पूर्व विधायक रमेश खंडेलवाल, पुलिस उपाधीक्षक दिनेश यादव, सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल सुरेन्द्र सिंह, कांग्रेस नेता सुरेश मोदी, रघुवीर सिंह भूदोली, करण सिंह, वीरचक्र विजेता जयराम सिंह ने पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। शहीद की पार्थिव देह को जैसे ही घर पर लाया गया तो भाई बलबीर संदूक से सिर मारते हुए बिलख पड़ा। परिवार के लोग भाई को हिम्मत बंधाते रहे। छोटी पोती ने भी अपने दादा को हाथ जोड़ विदाई दी।


डाबला गांव का पहला शहीद
शहीद रामनिवास यादव डाबला क्षेत्र का पहले शहीद हुए हैं। शहीद का साथी शिक्षक रामनिवास यादव ने बताया कि वह बचपन से ही सेना में जाकर देश सेवा करना चाहता था। शहीद के साथियों का कहना था कि वह सबसे मिलनसार थे। शहीद की शव यात्रा क दौरान ग्रामीणों ने भारत मां के जयकारे लगाए।

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तिरंगा लेते समय बेटा हो गया भावुक
शहीद की पार्थिव देह सुबह जैसे ही घर पहुंची तो घर पर कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष ने उनके बेटे संदीप को शव को लिपटा कर लाया तिरंगा सौंपा,जिसे पाकर बेटा भावुक हो गया।

मां पर पहले ही टूट चुका दुखों का पहाड़
शहीद रामनिवास की मां नानची देवी अपना बड़ा बेटा माड़ूराम पहले ही खो चुकी है। बीमारी से 10 वर्ष उसकी मौत हो चुकी है। दूसरे बेटे ने देश की खातिर अपने प्राण न्योछावर कर दिए। नानची के अब तीन बेटे हैं। वह घर पर ही खेती करते हैं।


महिलाएं भी पहुंची मोक्षधाम
शहीद रामनिवास की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए गांव के बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों तक को पीछे नहीं हटे। गांव की महिलाएं भी अंतिम विदाई देखने के लिए मोक्ष धाम में पहुंची। लोगों ने भारत माता के जयकारे, पाकिस्तान मुर्दाबाद, जब तक सूरज चांद रहेगा रामनिवास तेरा नाम रहेगा जैसे नारे लगाए।


मां ने बेटे को अंतिम बार दुलारा तो भर आई आंखें
शहीद रामनिवास की वीरांगना भगवती देवी ने अपने पति को नम आंखो से अंतिम विदाई दी। परिजन जैसे ही वीरांगना को पार्थिव देह के पास लेकर आए तो माहौल अधिक गमगीन हो गया। मां अनची देवी ने भी अपने लाल को हाथों से दुलार कर खुशी-खुशी विदा किया। बेटी सुमन अपने पिता की पार्थिव देह को देख बिलख पड़ी।