दिनेश कुमार सैनी सीकर/ कांवट. राजस्थान के सीकर जिले के कांवट कस्बे के रेलवे स्टेशन मार्ग पर पहाड़ी पर स्थित अंबिका माता मंदिर 300 साल पुराना है।
सीकर/ कांवट. राजस्थान के सीकर जिले के कांवट कस्बे के रेलवे स्टेशन मार्ग पर पहाड़ी पर स्थित अंबिका माता मंदिर 300 साल पुराना है। सालों पूर्व यहां सिंहाजी नाम के गृहस्थ तपोनिष्ठ संत हुए थे। संत सिंहाजी हिंगलाज माता के भक्त थे। कहा जाता है कि सिंहाजी महाराज अपने तप के प्रताप से हिंगलाज माता के दर्शनों के लिए रोजाना हिंगलाज जाया करते थे, लेकिन वृद्धावस्था में माता के दर्शनों के लिए हिंगलाज जाने में असमर्थ होने पर सिंहाजी महाराज ने कांवट में ही दर्शन देने के लिए माता से प्रार्थना की। हिंगलाज माता ने सिंहाजी के तप से प्रसन्न होकर कांवट में स्थित पहाड़ी पर दर्शन देने के लिए कहा। इसके बाद संत सिंहाजी इस पहाड़ी पर तपस्या करने लगे। सिंहाजी के तप से प्रसन्न होकर माता ने पहाड़ी पर पत्थर रूप में सिंहाजी की इच्छा स्वीकार की। इसके बाद सिंहाजी पहाड़ी पर ही माता के दर्शनों के लिए जाया करते थे। इसके बाद लोगों की आस्था भी माता के मंदिर से जुड़ गई। लोग प्रतिदिन माता के दर्शनों के लिए मंदिर में आते हैं। नवरात्र के समय मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। वर्तमान में मंदिर के विकास व धार्मिक आयोजनों के लिए कांवट, जुगलपुरा आदि गांवों के प्रबुद्ध जनों की एक मंदिर कमेटी है। कमेटी के सहयोग से साल भर में यहां कार्यक्रम होते रहते हैं। नवरात्र के अलावा पौष माह में यहां पौषबड़ा महोत्सव भी होता है। पौषबड़ा महोत्सव में आसपास के श्रद्धालु माता के दर्शन कर यहां पंगत प्रसादी ग्रहण करते हैं।
भामाशाहों ने बनवाया मंदिर व सीढिय़ा
मंदिर पुजारी महेश शर्मा ने बताया सन् 1839 में गांव के भामाशाह रामसहाय, बजरंग लाल पोद्दार की मन्नत पूरी होने पर उन्होंने इच्छा स्वरूप चमत्कारी रूप में अंबिका माता के भव्य मंदिर का निर्माण कराया। पूर्व में माता के मंदिर में जाने के लिए सीढिय़ां नहीं बनी हुई थी। श्रद्धालु पहाड़ी पर सीधे चढ़कर ही माता के दर्शनों के लिए जाया करते थे। बाद में गांव के भामाशाह नारायण दास चौधरी ने 1983 में नए सिरे से माता के दर्शनों के लिए 185 सीढिय़ों का निर्माण कराया। सीढिय़ां बनने के बाद आसपास के लोगों को माता के दर्शनों में आसानी हो गई।
नवरात्र में उमड़ती है भीड़
क्षेत्र के लोगों में अंबिका माता की विशेष मान्यता है। नवरात्र के समय 9 दिन तक है मंदिर में माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। मंदिर में नवरात्र के समय विशेष पूजा-अर्चना होती है। नवरात्र में क्षेत्र के श्रद्धालु प्रतिदिन माता के दर्शन करने आते हैं और सुबह व शाम की आरती में शामिल होते हैं। नवरात्र में दूरदराज से प्रवासी लोग भी जात जडूला के लिए मंदिर में आते हैं।
नवरात्र में नवमी को भरता है मेला
हर साल नवरात्र में नवमी के दिन अंबिका माता का वार्षिक मेला भरता है। हालांकि कॉविड के चलते पिछले 2 साल से माता का मेला नहीं लगा। इस बार नवमी को दो साल बाद मेला लगेगा। मेले में दूरदराज सहित आसपास के लोग आते हैं। मेले में मंदिर कमेटी की ओर से कुश्ती दंगल का आयोजन भी होता है।