शिक्षा के बहाने सियासत: जानिए महाराणा प्रताप और जौहर को लेकर इतिहासकारों और शिक्षक संगठनों ने क्या कहा ?

Vinod Singh Chouhan | Publish: May, 17 2019 11:27:40 AM (IST) | Updated: May, 17 2019 07:49:09 PM (IST) Sikar, Sikar, Rajasthan, India

शिक्षा विभाग की पुस्तकों के स्कूलों में आने से पहले ही सियासी दंगल शुरू हो गया है। पिछली भाजपा सरकार द्वारा पाठ्यक्रम में बदलाव करने के बाद शुरू हुई सियासत अब थमने का नाम नहीं ले रही है।

सीकर.

शिक्षा विभाग ( education department ) की पुस्तकों ( Books ) के स्कूलों में आने से पहले ही सियासी दंगल शुरू हो गया है। पिछली भाजपा सरकार द्वारा पाठ्यक्रम में बदलाव करने के बाद शुरू हुई सियासत अब थमने का नाम नहीं ले रही है। भाजपा जहां पाठ्यक्रम में हुए बदलाव को लेकर कांग्रेस को निशाने पर ला रही है। वहीं शिक्षा राज्य मंत्री Govind Singh Dotasara का तर्क है कि बच्चों को वही तथ्य पढ़ाया जाएगा जो सही है। राजस्थान पत्रिका टीम ने इस मामले में इतिहासकार, शिक्षक संगठन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बातचीत की। विभाग ने जहां गलतियों को ठीक करने का दावा किया है। वहीं शिक्षक संगठनों ने इसे विचारधारा का झगड़ा बताया है। बारहवीं इतिहास की पुस्तक के लेखक अरविन्द भास्कर का कहना है कि पुस्तकों में गलत तथ्य कुछ भी नहीं जोड़ा गया है।


BJP ने दी उपाध्याय व सावरकर को तवज्जो
पिछली भाजपा सरकार ने NCERT पाठ्यक्रम को हटाकर उसके स्थान पर नई पुस्तकें लागू कर दी थी। इन पुस्तकों में गणित, राजनीति विज्ञान, इतिहास, समाजोपोगी योजनाएं पुस्तक काफी विवादित रही। गणित की पुस्तकों में जहां गलतियों की भरमार थी वहीं राजनीति विज्ञान और इतिहास की पुस्तकों में गांधी और नेहरू के मुकाबले दीनदयाल उपाध्याय, सावरकर और पीएम नरेन्द्र मोदी को तरजीह देने पर काफी विवाद हुआ था। ‘समाजोपयोगी योजनाएं’ नामक पुस्तक में राज्य और केन्द्र सरकार की योजनाओं का जिक्र था जो राजस्थान के सामान्य ज्ञान हेतु उपयोगी पुस्तक ‘राजस्थान अध्ययन’ को हटाकर लागू की गई थी।


कितना हुआ है बदलाव
कक्षा 9 से 12 तक की ‘समाजोपयोगी योजनाएं’ पुस्तक के अलावा पुराने पाठ्यक्रम की किसी भी पुस्तक को पूरी तरह नहीं बदला गया है। सूत्रों के अनुसार कक्षा नवीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के भाग दो में दो नए पाठ शामिल किए गए है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सुरक्षा, शौर्य परम्परा व वीर सैनिकों की शौर्य गाथाएं और विधिक जागरुकता के पाठ शामिल किए गए है।


इन तथ्यों को लेकर है विवाद
महाराणा प्रताप की पराजय Maharana Pratap
विवाद: दावा किया जा रहा है कि कक्षा बारहवीं की इतिहास की संशोधित पुस्तक के अनुसार हल्दीघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की पराजय हुई थी और इस पराजय के कारणों में प्रताप में धैर्य की कमी, परम्परागत युद्ध शैली आदि थे। भाजपा सरकार के पुराने पाठ्यक्रम में इस युद्ध में प्रताप की जीत का दावा किया गया था। ऐसे में विपक्ष सरकार को घेरने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहता।
हकीकत: इधर, शिक्षा रा’य मंत्री ने संशोधित पाठ्यक्रम में ऐसे तथ्य होने से इंकार करते हुए आरोपों को निराधार बताया है।

जौहर
विवाद: कक्षा आठवीं की अंग्रेजी की पुुस्तक में चित्तौड़ दुर्ग पर लिखी गई कविता के पाठ में जौहर का चित्र दिया गया था। कुछ शिक्षकों का तर्क है कि कविता में जौहर का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया था।
हकीकत: संशोधित पाठ््यक्रम में कविता को बरकरार रखते हुए ‘जौहर’ के स्थान पर ‘चित्तौड़ दुर्ग’ का चित्र दिया गया है। विपक्ष ‘जौहर’ के चित्र को हटाने का विरोध कर रहा है। पाठ्यक्रम कमेटी का कहना है कि कविता चित्तौड़ दुर्ग पर है, इसलिए दुर्ग का चित्र शामिल किया है।

वीर सावरकर
विवाद: कक्षा दसवीं की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में विनायक दामोदर सावरकर का जीवन परिचय दिया गया था। भाजपा नेताओं का तर्क है कि इसे हटा दिया गया है। जबकि कुछ और है।
हकीकत: संशोधित पाठ्यक्रम में सावरकर के पुराने विवरण को बरकरार रखते हुए यह तथ्य अतिरिक्त जोड़ दिया कि जेल से रिहा होने के लिए सावरकर ने ब्रिटिश सरकार के सामने दया याचिकाएं प्रस्तुत की थी। इतिहासकारों का दावा है कि यह तथ्य ऐतिहासिक रूप से सही है लेकिन भाजपा से जुड़े नेताओं ने दया याचिकाओं के जिक्र का विरोध किया है।

दावे हुए लेकिन नहीं हुई तुलना
भाजपा शासन में मध्यकालीन भारतीय इतिहास के वर्णन से मुस्लिम शासकों का क्रमबद्ध इतिहास हटा दिया गया था। तत्कालीन शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी ने दावा किया था कि पाठ्यक्रम मेें अकबर के स्थान पर प्रताप को महान् पढ़ाया जाएगा। लेकिन दसवीं और बारहवीं की पुस्तकों में कहीं भी प्रताप के नाम के साथ महान नहीं लिखा गया। अब कांगे्रस राज में भाजपा इसी शब्द को लेकर सियासत करने पर तुली है।


एक्सपर्ट व्यू
मौजूदा विवाद ऐतिहासिक तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक विचारधाराओं का टकराव है। ऐसा कोई नया तथ्य नहीं जोड़ा गया है जिसकी पुष्टि इतिहास नहीं करता हो। कक्षा 7वीं, दसवीं और बारहवीं की तीनों पुस्तकों में प्रताप के बारे में एक जैसी ही जानकारी व तथ्य दिए गए है। महाराणा प्रताप की हार का कहीं भी उल्लेख नही किया गया है। -अरविन्द भास्कर, 12 वीं इतिहास पुस्तक के लेखक

प्रदेश का हर युवा और अभिभावक चाहता है कि पुस्तकों में उसको सही जानकारी मिले। उन्ही की मंशा के अनुसार कांग्रेस सरकार ने गलत तथ्यों को पुस्तकों से हटाया है। भाजपा ने विद्यार्थियों पर अपनी मानसिकता थोपने की कोशिश की थी। शहीदों के नाम पर राजनीति करने वालों ने कभी भी शहीदों के पाठ नहीं जोड़े। -गोविंद सिंह, शिक्षा राज्य मंत्री


प्रदेश के विद्यार्थियों को एकदम सटीक और तथ्यों पर आधारित शिक्षण सामग्री ही पढ़ाई जानी चाहिए। पुस्तकों को राजनीति का अखाड़ा बनाना कतई सही नहीं है। पुस्तकों को राजनीति के मैदान तक घसीटना ठीक नहीं है।- शीशराम रणवां, शिक्षाविद्

पाठ्यक्रम निर्धारण करना शिक्षाविदों का विषय है लेकिन सरकारें अपनी विचारधारा का प्रचार करने के लिए पाठ्यक्रम को हथियार के रूप में काम में लेने लगी है। इतिहास को इतिहास के आधार पर ही लिखना चाहिए। तोड़ मरोडकऱ इतिहास कतई प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। इतिहास से देश का भविष्य तय होता है इसलिए हमारे रीयल हीरो को पाठ्यक्रम में जोड़ा जाना चाहिए। अपने बचाव में माफीनामा लिखने वालों को नहीं ,फांसी के फंदों को चूमने वालों को पाठ्यक्रम में स्थान दिया जाना चाहिए। -उपेन्द्र शर्मा प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत)

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