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तबादलों से बैन नहीं हटने पर भड़के राजस्थान के थर्ड ग्रेड टीचर, 25 जून को हर जिले में आंदोलन की तैयारी

Rajasthan Teacher: शिक्षक पद सोपान में सबसे अंतिम पायदान पर नियुक्त ग्रेड थर्ड शिक्षकों के साथ सरकार का 'थर्ड ग्रेड टॉचर्र' लगातार जारी है। राज्य सरकार की 5 जुलाई तक तबादलों से हटाई रोक को इस बार भी इन शिक्षकों पर लागू नहीं किया है।
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सीकर

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Anil Prajapat

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Updated: 22 Jun 2026, 11:17 AM IST

Rajasthan third grade teachers

तबादलों पर रोक नहीं हटने से शिक्षक संगठनों में आक्रोश। पत्रिका फाइल फोटो

सीकर। शिक्षक पद सोपान में सबसे अंतिम पायदान पर नियुक्त ग्रेड थर्ड शिक्षकों के साथ सरकार का 'थर्ड ग्रेड टॉचर्र' लगातार जारी है। राज्य सरकार की 5 जुलाई तक तबादलों से हटाई रोक को इस बार भी इन शिक्षकों पर लागू नहीं किया है। उधर, 6 साल से इनकी पदोन्नति भी कानूनी पचड़े में फंसी हुई है। ऐसे में पद और स्थान दोनों परिवर्तनों का लाभ नहीं मिलने से करीब 1.22 लाख शिक्षक पदोन्नति व तबादला नीति के दो पाटों में पिसते महसूस कर रहे हैं।

राजस्थान शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष उपेंद्र शर्मा ने कहा कि 5 जुलाई तक के लिए खुले तबादलों के दायरे में ग्रेड थर्ड शिक्षकों को शामिल नहीं कर सरकार ने फिर उनके साथ अन्याय किया है। डीपीसी को लेकर भी राजस्थान सरकार कोर्ट में कोई सार्थक कदम नहीं उठा रही। इससे लाखों शिक्षक परेशान और आक्रोशित है। इन मुद्दों पर 25 जून को जिला मुख्यालयों पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

थर्ड ग्रेड शिक्षकों का स्थानांतरण करने का आग्रह

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने भजनलाल सरकार से थर्ड ग्रेड शिक्षकों का स्थानांतरण कर राहत प्रदान करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने द्वितीय श्रेणी से लेकर सभी संवर्गों के शिक्षकों के स्थानांतरण खोलने पर सीएम भजनलाल शर्मा का आभार जताया।

शिक्षा मंत्री ने दिया था तबादला नीति लागू करने का आश्वासन

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष संपत सिंह ने कहा कि पिछले महीने चार सुत्रीय मांगों के आंदोलन में ग्रेड थर्ड शिक्षकों का तबादला और पदोन्नति का विषय भी शामिल था। शिक्षा मंत्री ने वार्ता में सुप्रीम कोर्ट में स्टे तुड़वाकर 15 अगस्त तक पदोन्नति करने और जल्द ही तबादला नीति लागू करने का आश्वासन भी दिया था। यदि ये आश्वासन पूरा नहीं हुआ तो महासंघ जल्द ही आंदोलन की रणनीति बनाएगा।

आठ साल से अटके तबादले, 90 हजार को इंतजार

प्रदेश में ग्रेड थर्ड शिक्षकों के अंतिम बार तबादले 2018 में हुए थे। उसके बाद से सरकारें तबादला नीति लागू करने का हवाला देते हुए उसे लगातार टाल रही है। इससे दूरदराज के इलाके में लंबे समय से नियुक्त 90 हजार से ज्यादा शिक्षकों का तबादलों का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। प्रतिबंधित 10 जिलों में तो कई शिक्षक 15-15 साल से घर वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

32 हजार शिक्षकों की अटकी पदोन्नति

ग्रेड थर्ड शिक्षकों की पदोन्नति भी छह साल से अटकी हुई है। अतिरिक्त विषय से स्नातक डिग्री की वैधता को लेकर चल रहे न्यायिक विवाद की वजह से करीब 32 हजार शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हो पा रही। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि सरकार के ढीले रवैये की वजह से ही मामला कोर्ट में ढीला चल रहा है। यदि ग्रेड थर्ड शिक्षक पदोन्नत होते तो द्वितीय श्रेणी शिक्षक नियुक्त होने पर उन्हें तबादलों का लाभ भी मिल जाता।

तबादला और नीति इसलिए नहीं

1. ग्रेड थर्ड शिक्षकों की संख्या प्रदेश में करीब ढाई लाख है। जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने क्षेत्र में शिक्षकों को रोकने या बुलाने के दबाव से बड़े पैमाने पर असंतोष और विरोध की आशंका सरकार के सामने बड़ी बड़ी चुनौती खड़ी कर सकती है।
2. तबादलों से लोकप्रिय जिलों में शिक्षकों की अधिकता और दूरदराज व जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी हो सकती है। इससे भर्ती की जोनल व्यवस्था भी बेमतलब हो जाएगी।
3. स्थाई तबादला नीति लागू नहीं होने के पीछे ग्रेड थर्ड शिक्षकों के बड़े वोट बैंक को तबादलों की ताकत के बूते अपने पक्ष में करने और उन पर सियासी नियंत्रण रखने की सियासी सोच है। स्थाई नीति से सरकार से लेकर स्थानीय नेताओं तक को चल- बल खत्म होने का डर है।