
राजस्थान के तृतीय श्रेणी शिक्षकों को तबादले का इंतजार। फोटो: एआई
Rajasthan Teacher Transfer Policy: राजसमंद। राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों को लेकर 8 वर्षों से जारी इंतजार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जहां सरकार ने 19 जून से 5 जुलाई तक सभी संवर्गों के लिए स्थानांतरण से प्रतिबंध हटाया है, वहीं तृतीय श्रेणी शिक्षकों को इस राहत से बाहर रखा है। सरकार के इस दोहरे रैवये से शिक्षकों में गहरा आक्रोश है। राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय (अनुभाग-1) विभाग के आदेश में स्पष्ट किया है कि 19 जून से 5 जुलाई तक स्थानांतरण प्रतिबंध हटाया गया है।
लेकिन शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी वेतन श्रेणी के अध्यापकों पर प्रतिबंध यथावत रहेगा। चिकित्सा विभाग सहित कुछ श्रेणियों को भी विशेष परिस्थितियों में छूट दी गई है इसी निर्णय को लेकर शिक्षक संगठनों ने इसे दोगला व्यवहार बताते हुए विरोध जताया है।
प्रदेश में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले वर्ष 2018 के बाद से पूरी तरह बंद हैं। करीब 10 जिलों को ‘डार्क जोन’ घोषित किया गया है। बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, सिरोही, बीकानेर, बारां, झालावाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ ऐसे जिले हैं जो डार्क जोन में शामिल हैं। इन जिलों में पदों की कमी के कारण शिक्षकों के स्थानांतरण लगभग असंभव बने हुए हैं।
राजस्थान में तबादला नीति की कवायद 1994 से जारी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी नीति लागू नहीं हो पाई।
1994: अनिल बोर्दिया कमेटी का ड्राफ्ट, लागू नहीं
1997-98: ग्रामीण ठहराव आधारित निर्देश
2005: विभागीय दिशा-निर्देश
2015: मंत्री स्तरीय कमेटी, नीति अधर में
2018: पुनः कमेटी गठन, परिणाम शून्य
2020: रिपोर्ट बनी, कैबिनेट मंजूरी नहीं
2024: ड्राफ्ट प्रस्तुत, नीति फिर भी लंबित
इस तरह लगभग 31 वर्षों में दर्जनभर सरकारें बदलने के बावजूद नीति सिर्फ फाइलों में सीमित रही।
हरियाणा: 13 महीने में नई तबादला नीति लागू
दिल्ली: हर वर्ष नियमित शिक्षक तबादले
कर्नाटक और बिहार: हर 5 साल में स्थानांतरण प्रक्रिया
इसके मुकाबले राजस्थान में पिछले 8 वर्षों से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले पूरी तरह ठप हैं।
| वर्ष | नियुक्ति संख्या |
|---|---|
| 2011 | 39,000 |
| 2012 | 20,000 |
| 2015 | 15,000 |
| 2017 | 54,000 |
| 2021 | 15,500 |
| 2022 | 48,000 |
| 2026 (प्रस्तावित) | 7,759 पद |
शिक्षक संगठनों का कहना है कि कई शिक्षक 15 से 20 वर्षों से अपने गृह जिले में स्थानांतरण का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन नीति के अभाव में केवल सिफारिश और पहुंच वाले ही लाभ पा सके। इस मुद्दे पर शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहरसिंह सलावद ने सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है और सरकार को तुरंत स्थायी तबादला नीति लागू करनी चाहिए।
Updated on:
21 Jun 2026 08:57 am
Published on:
21 Jun 2026 08:57 am
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