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पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं दे रहा था पति, अदालत ने कहा अब रहो साथ

Court Order : पारिवारिक न्यायालय सीकर के न्यायाधीश कैलाश चन्द्र अठवासिया ने पत्नी व बच्चों को बकाया गुजारा भत्ता की राशि अदायगी नहीं करने पर पति की तलाक याचिका को खारिज किया है।

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Court Order : पारिवारिक न्यायालय सीकर के न्यायाधीश कैलाश चन्द्र अठवासिया ने पत्नी व बच्चों को बकाया गुजारा भत्ता की राशि अदायगी नहीं करने पर पति की तलाक याचिका को खारिज किया है। प्रकरण के अनुसार लाली उर्फ वन्दना पत्नी जितेन्द्र चावला पुत्री सीताराम निवासी जगमालपुरा सीकर का विवाह 24 अप्रैल 2012 को हुआ था।

शादी के बाद पति पत्नी के मध्य विवाद होने पर पत्नी लाली उर्फ वन्दना ने अधिवक्ता पुरुषोत्तम शर्मा सुखदेव सिंह महला एडवोकेट के मार्फत पारिवारिक न्यायालय में स्वयं व अपने बच्चों के लिए गुजारा भत्ता का आवेदन पेश किया। जिस पर न्यायालय ने 04 अगस्त 2021 को 4000 रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता की राशि देने के आदेश पारित किए थे।

इसके बाद लाली उर्फ वन्दना के पति जितेन्द्र चावला ने तलाक याचिका पेश कर न्यायालय से तलाक की मांग की। न्यायालय के आदेश की अनुपालना आज तक बकाया राशि जमा नहीं करवाई। वन्दना के अधिवक्ताओं ने तलाक याचिक के प्रकरण डिफेन्स स्ट्राईक ऑफ करने का आवेदन पेश किया। अगर पति बकाया गुजारा भत्ता की राशि का भुगतान नहीं करे तो पारिवारिक न्यायालय डिफेन्स स्ट्राईक ऑफ का आवेदन स्वीकार कर सकता है। इस पर पारिवारिक न्यायालय सीकर ने उच्चतम न्यायालय के महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टान्तों का अवलोकन किया।

इसके साथ ही कहा कि इतना शक्तिहीन नहीं है कि पति को दंडित ना कर सकें। यदि पति भरण पोषण का बकाया भुगतान पत्नी को करने में विफल रहता है तो उसकी प्रतिरक्षा का अवसर समाप्त कर सकता है। ऐसी परिस्थितियों में प्रकरण के तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए पति जितेन्द्र कुमार पुत्र किशन लाल चावला निवासी खंडेला जिला सीकर की तलाक याचिका खारिज करने के आदेश पारित किए गए।