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बेहद दर्दभरी है इस दम्पती की दास्तां, दोनों की आंखों से रोज बहता है आंसुओं का दरिया

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Husband Wife Suffering TB in Duriya village of udaipurwati jhunjhunu

Husband Wife Suffering TB in Duriya village of udaipurwati jhunjhunu

मनोज टांक/उदयपुरवाटी. हम जीना चाहते हैं, ताकि बेटों के सपनों को पूरा कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करा सके। लंबे समय से हम दोनों टीबी रोग के चलते जिंदगी और मौत के बीच घिरे हुए हंै।

बीमारी के चलते परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है। लंबे समय से हम दोनों दुआओ व दवाओं के सहारे जैसे तैसे करके जीवन व्यतीत कर रहे हैं, लेकिन बीमारी पीछा छोडऩे का नाम तक नहीं ले रही है।

यह कहना है उपखंड क्षेत्र के दुडिय़ा गांव के महावीर पुत्र शिवचंद मेघवाल व उसकी पत्नी अनिता देवी मेघवाल का। करीब 8 साल से खुद महावीर व बीते 3 साल से अनिता टीबी से ग्रस्त है।

बीमारी के चलते परिवार की आर्थिक स्थिति दिनों-दिन कमजोर होती चली गई है। दो वक्त की रोटी के लिए बड़े बेटे रविकांत (16) की पढ़ाई भी बीच में ही छूट गई है। वह मजदूरी करके परिवार की गाड़ी को खिसका रहा है। छोटे बेटे सुनील (14) को जैसे-तैसे करके पढ़ाया जा रहा है।

महावीर की मां शायरी का भी निधन भी कुछ इसी प्रकार की बीमारी के चलते कई 7-8 साल पहले हो चुका है। इस परिवार को सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मिल रही है।

टूटी फूटी कच्ची झोपड़ी में गुजर बसर कर रहे इस परिवार को बीमारी के चलते भाई ने एक कमरा फिलहाल रहने को दे रखा है। ऐसा ही चलता रहा तो बच्चे भी उक्त बीमारी की चपेट में आ सकते है।

हालात यह है कि पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने वाली स्लोगन के उलट बीमार पत्नी ही पति को एक रेहड़ी पर बिठाकर खुले में शौच के लिए लेकर जाने को मजबूर है।

सरकार के साथ-साथ परिवार की आखिरी उम्मीद अब दानी, सज्जन, सेठों के अलावा मददगारों पर टिकी हुई है। अगर कोई दानदाता, संस्था आदि इस परिवार की मदद के लिए आगे आते हैं तो इस परिवार की मदद तो होगी ही, साथ ही इस परिवार की दुआएं भी मदद करने वालों को मिलेगी।