
Solar News: सोलर लगाने वालों को मिले प्रोत्साहन तो बढ़ेगा रुझान और हारेगा बिजली संकट
सीकर. प्रदेश में हर साल बढ़ते बिजली संकट के बाद भी सरकार सौर ऊर्जा अपनाने वालों को प्रोत्साहित नहीं कर पा रही है। सोलर अनुदान की योजनाओं के अटके आवेदन और बदले नियमों की वजह से लोगों का रुझान नहीं बढ़ पा रहा है। खुद सरकार ने भी बिजली संकट को हराने के लिए सौर ऊर्जा को ही सबसे बड़ा विकल्प माना है। शेखावाटी के दस हजार से अधिक किसान सोलर को अपनाने के लिए तैयार है, लेकिन अनुदान के पेच की वजह से इनकी फाइल अंधेरे में है। यहां की कई शिक्षण संस्थाओं के साथ किसान व उद्योगपतियों ने इस विकल्प को अपनाया है। इसके दम पर वह बिजली संकट को हराने में भी जुटे हैं। सौर की राह अपनाने वाले नवाचारी किसान व संस्थानों के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार ने अब सोलर एनर्जी के प्रोजेक्ट लगाने वालों पर कई तरह के टैक्स लगा दिए हैं। जबकि ऊर्जा नीति 2019 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। शेखावाटी के उद्यमियों का कहना है कि सरकार को उद्योगों में सोलर पैनल लगवाने वाले उद्योगपतियों को भी अनुदान देना चाहिए।
घरेलू उपभोक्ताओं को अनुदान
घरेलू उपभोक्ताओं को सोलर लगाने पर अनुदान दिया जा रहा है। यदि किसी उपभोक्ता की ओर से बिजली का उपभोग नहीं किया जाता है सोलर के जरिए बिजली देने वाली राशि का पुनर्भरण अगले बिलों में किया जाता है। कोरोनाकाल में भी व्यावसायिक उपभोक्ताओं को छूट नहीं दी गई, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं की राहत जारी है।
आप भी करें पहल, इस तरह लगा सकते हैं सोलर
एक किलोवाट से एक मेगावाट का सोलर सिस्टम लगता है। एक किलोवाट के सिस्टम के लिए न्यूनतम 10 स्क्वायर मीटर जगह की आवश्यकता होती है। चार यूनिट बिजली प्रति किलोवाट सामान्यत बनती है। सोलर प्लांट की उम्र करीब 25 वर्ष तक की मानी गई है।
अपने दम पर दूर किया बिजली संकट
केस 01 : हर रोज डिस्कॉम को 1200 यूनिट सप्लाई
भढ़ाडर निवासी स्कूल संचालक रामनिवास ढाका ने पूरे परिसर में सोलर सिस्टम कई वर्ष पहले अपनाया था। इनके यहां रोजाना 1200 यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन होता है। इससे एक गांव को आसानी से बिजली सप्लाई हो रही है। उनका कहना है कि जब सरकार की ओर से बड़े उद्योगपतियों को सोलर पावर प्लांट पर ढाई रुपए प्रति यूनिट तक का अनुदान दिया जा रहा है तो फिर छोटे संस्थानों को क्यों नहीं दे रहे। जबकि निगम संस्थाओं से मिलने वाली बिजली को ऊंची दरों पर बेच रहा है।
केस 02 : बिजली कनेक्शन नहीं मिला तो अपनाया सोलर
किसान रामचंद ने बताया कि चार साल पहले बिजली निगम में कृषि कनेक्शन के लिए आवेदन किया। एक साल तक कनेक्शन नहीं मिलने पर एक कंपनी से अनुदान योजना के तहत कनेक्शन लगवा दिया। उनका कहना है कि अब बिजली संकट के बाद भी आसानी से सब्जियों की खेती की सिंचाई कर पा रहे हैं।
राजस्थान बना सकता है देश को सौर में सिरमौर
1. चीन को मात देना बड़ी चुनौती
सोलर से बिजली उत्पादन के मामले में दुनियाभर में चीन सबसे आगे है। यहां करीब 150 गीगावाट के सोलर उत्पादन के प्लांट लगे हुए हैं। यूएसए और जापान जैसे देश भी भारत से आगे हैं। हमारे देश में वर्तमान में 28 गीगावाट बिजली जनरेशन के प्लांट लगे हुए हैं।
2. हमारे दम पर 2022 का लक्ष्य
सोलर जनरेशन में भारत ने वर्ष 2022 तक 100 गीगावाट बिजली जनरेशन के प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है। इसमें राजस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य के छह जिलों का भी चयन किया गया। यहां कई कंपनियों के प्रोजेक्ट भी शुरू हुए हैं।
3. 2028 में बन सकते हैं अव्वल
यदि 2022 के अंत तक हम 100 गीगावाट का लक्ष्य अर्जित कर लेते हैं तो 2028 तक हम विश्व में सोलर जनरेशन में सबसे बड़ा नाम होंगे।
Published on:
14 May 2022 11:33 am
बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
