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नोटबंदी के बाद क्रिकेट सट्टा कारोबार के तौर-तरीके बदल गए हैं। हार-जीत की राशि का लेन-देन रोकड़ के अलावा ऑनलाइन भी होने लगा है। ऑनलाइन पेमेंट ई-वॉलेट से स्वीकार किया जा रहा है। जबकि रोकड़ का हिसाब 'जैसे दो-वैसे लो' यानि जैसे नोट दो, वैसे ही नोट मिलेंगे। पुराने नोट देने पर वापस पुराने मिलेंगे और नए नोट देने पर वापस नए नोट मिलेंगे। सट्टा कारोबार में ई-वॉलेट के प्रचलन से पुलिस के लिए सटोरियों को पकडऩा मुश्किल हो गया है। नोटबंदी के बाद जोधपुर में सट्टा कारोबार नहीं पकड़ा गया है। सटोरियों को पकडऩे के लिए पुलिस नए तरीके अपनाने पर विचार कर रही है।
नोटबंदी के बाद हवाला कारोबार कम होने के कारण एकबारगी सट्टा कारोबार बंद हो गया था। कुछ दिनों बाद सटोरियों ने ऑनलाइन लेन-देन शुरू किया तो इस कारोबार ने फिर रफ्तार पकड़ ली। सूत्रों की मानें तो वर्तमान में बांग्लादेश में चल रही बांग्लादेश प्रीमियर लीग, भारत-इंग्लैण्ड सीरीज व ऑस्ट्रेलिया-साउथ अफ्रीका सीरीज पर बड़े स्तर पर सट्टा लग रहा है।
इस कारोबार में नहीं नकदी की किल्लत
भारतीय बाजार भले ही नकदी की किल्लत से जूझ रहा हो, लेकिन क्रिकेट सटोरियों के पास नकदी की कोई कमी नहीं है। ऑनलाइन के साथ नकद का कारोबार रोजाना करोड़ों में हो रहा है। अकेले जोधपुर में रोजाना करोड़ों रुपए का सट्टा क्रिकेट में लगाया जा रहा है। ये बुकी बांग्लादेश प्रीमियर लीग पर ज्यादा दाव लगा रहे हैं। हिसाब पचास लाख से ऊपर होने पर लेन-देन में हवाला का सहारा लिया जा रहा है।
सटोरियों का वॉट्सअप ग्रुप
अपने कामकाज के लिए बुकी द्वारा वॉट्सअप ग्रुप बना लिया गया है। इसमें सटोरियों को शामिल किया गया है, जो सट्टा लगाते है। इन सटोरियों को फंटर कहा जाता है। फंटर सट्टा लगाते हैं और बुकी इस सौदे को आगे लगाकर भाव देते हैं।
Published on:
30 Nov 2016 03:34 pm

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