
खाटूश्यामजी. आस्था की बहार और चहुं और बाबा श्याम, लखदातार की जय, श्याम प्यारे की जय, हारे के सहारे बाबा श्याम का जयकार लगाते श्रद्धालु बाबा श्याम के दरबार की ओर बढ़ रहे हैं।

कोई पैदल चलकर तो कोई पेट के बल बाबा के हाजिरी लगाने पहुंचा है। श्याम सरकार की एक झलक पाने को हर कोई बेताब नजर आ रहा है।

यह नजारा था बाबा श्याम के फाल्गुनी लक्खी मेले के दूसरे दिन रविवार को शुक्लपक्ष की तृतीया का।

इस दिन दूर दराज के गांवो और शहरों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने कुल देवता एवं आराध्य देव श्री श्याम के दरबार में मत्था टेककर मनौती मांगी।

श्याम भक्तों के लिए बाबा श्याम का मेला किसी त्यौहार से कम नहीं है। कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, जयपुर, बेंगलौर, अहमदाबाद, आसाम, बिहार, पंजाब, हरियाणा सहित देश के अनेक हिस्सों से आने वाले श्यामभक्तों को श्याम फाल्गुन मेले का बेसब्र्री से इंतजार रहता है।भक्त कई माह पहले ही खाटू आने की तैयारियां शुरू कर देते हैं।

दस गुना बढ़े श्याम बाबा के भक्त बाबा श्याम के मेले का विस्तार दिनो दिन बढता ही जा रहा है। जहां आज के एक दशक से पहले 2 लाख के करीब श्रद्धालु दर्शनार्थ खाटूधाम आते थे।

जैसे जैसे समय बीतता गया और बाबा के गुणगान देश ही नहीं विदेश में भी होने लगा जिसके चलते दिनों दिन बाबा के भक्तों की संख्या में इजाफा होने लगा।

2017 के फाल्गुनी मेले में 25 लाख के करीब भक्त दर्शनार्थ खाटूधाम पहुंचे थे।खाटूधाम में 20 के करीब खाने पीने के ढ़ाबे है मेले के दौरान इनकी संख्या सैकड़ों के करीब पहुंच जाती है। मगर इनमें भी भक्तों की पूर्ति नहीं होती।

यह पूर्ति मेले में लगे भण्डारों से होती है। मेले में 500 से भी अधिक भण्डारे लगते है।

रींगस रोड़ पर कदम कदम पर भण्डारे लगते है। कई भण्डारों में तो सभी तरह के व्यंजन भी मिलते है।