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VIDEO: शौचालय नहीं तो शादी नहीं, कई महिलाओं ने दी तलाक की चेतावनी

सचिन माथुरसीकर. अक्षय कुमार (Akshay kumar) अभिनीत फिल्म 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' (toilet ek prem katha) जैसा महिलाओं का दर्द लक्ष्मणगढ़ के बलारां गांव में सामने आया है।

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सीकर

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Sachin Mathur

Oct 27, 2021

VIDEO: शौचालय नहीं तो शादी नहीं, कई महिलाओं ने दी तलाक की चेतावनी

VIDEO: शौचालय नहीं तो शादी नहीं, कई महिलाओं ने दी तलाक की चेतावनी

सीकर. अक्षय कुमार (Akshay kumar) अभिनीत फिल्म 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' (toilet ek prem katha) जैसा महिलाओं का दर्द लक्ष्मणगढ़ के बलारां गांव में सामने आया है। गांव में बावरिया समाज के लोगों के पास शौचालय नहीं होने पर एक शख्स की पत्नी घर छोड़ चुकी है। जबकि कई महिलाओं ने पतियों को तलाक की चेतावनी दे दी है। एक युवक की तो शादी से पहले ही लड़की के परिजनों ने शौचालय युक्त मकान की शर्त रख दी है। मामले में महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मानवाधिकार आयोग को ज्ञापन भेजा है। जिसमें शौचालय सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है। जो पूरी नहीं होने पर पतियों को तलाक देने की चेतावनी दी है। पूरे प्रकरण में खुले में शौचमुक्त जिले की घोषणा की पोल खुलने के साथ 'जहां सोच, वहीं शौचालयÓ की टैग लाइन वाला स्वच्छता मिशन भी कसौटी पर आ गया है। क्योंकि महिलाओं की शौचालय वाली सोच सामने आ गई है, अब प्रशासन की परीक्षा है कि वह उसका निर्माण कब तक करवाता है।


एक की पत्नी ने छोड़ा, कई महिलाओं ने दी तलाक की चेतावनी
शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा नहीं होने पर महेश की पत्नी दो साल पहले ही पति को छोड़ चुकी है। जबकि बाकी कई महिलाओं ने भी तलाक की चेतावनी दी है। घोटा देवी, सरोज देवी, मंजू व सुमन सहित अन्य का कहना है कि शादी के बाद मकान तो दूर उन्हें शौचालय व स्नानघर जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं मिली है। जिससे उन्हें शर्मींदगी झेलनी पड़ती है।

शौचालय ने अटकाई युवकों की शादी

शौचालय व स्नान घर सहित मूलभूत सुविधाओं की कमी की वजह से समाज के युवकों की शादी में भी परेशानी खड़ी हो गई है। लक्ष्मी देवी ने बताया कि उसके बेटे घड़सी राम व समाज के अन्य युवक बीरबल की शादी के लिए घाटवा गांव से एक परिवार आया था। जिसने शौचालय व स्नानघर जैसी सुविधा नहीं होने पर शादी से इंकार कर दिया।

बोले-दस्तावेजों के साथ रहते हैं, वोट लेकर गायब हो जाते हैं नेता

गांव में वन विभाग के क्षेत्र व आसपास के इलाकों में बावरी समाज के करीब 20 परिवार चार पीढिय़ों से निवास कर रहे हैं। जिनके पास आधार कार्ड, वोटर आइडी कार्ड व राशन कार्ड भी हैं, लेकिन खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने वाले इन परिवारों को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। हालात ये हैं कि बीपीएल श्रेणी में होने पर भी इन्हें खाद्य सुरक्षा योजना तक से नहीं जोड़ा जा सका है।


प्रधानमंत्री व मानवाधिकार आयोग को भेजा ज्ञापन

शौचालय, स्नानघर, आवास व अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए बावरी समाज की ओर से प्रधानमंत्री मोदी व मानवाधिकार आयोग को भी ज्ञापन भेजा गया है। जिसमें भी शौचालय सरीखी सुविधा नहीं होने पर समाज में तलाक के मामले बढऩे की बात लिखते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की गई है। सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश सुंडा ने बताया कि योजनाओं का लाभ नहीं मिलने पर जहां महिलाओं को खुले में शौच व स्नान करना पड़ रहा है। वहीं, परिवार चलाने के लिए बच्चों को भी बालश्रम करना पड़ता है।

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