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यहां किसानों को घटिया बीज मिल गया तो इसकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं, कृषि विभाग बना अनजान

खरीफ की बुआई से पहले ही किसानो के साथ बड़ा खिलवाड़ होने लगा है। गांव-गांव में किराणा की दुकानो पर ही बीज बेचा जा रहा है

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यहां किसानों को घटिया बीज मिल गया तो इसकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं, कृषि विभाग बना अनजान

फतेहपुर. खरीफ की बुआई से पहले ही किसानो के साथ बड़ा खिलवाड़ होने लगा है। गांव-गांव में किराणा की दुकानो पर ही बीज बेचा जा रहा है। इस बीज की क्या प्रमाणिकता है? इसको लेकर कृषि विभाग के अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं। क्योंकि कृषि विभाग बीज भंडार के अलावा अन्य जगहों पर बीजों की जांच नहीं करता है। बीज बेचने के लिए सरकार ने भले ही कड़े प्रावधान कर रखे हैं लेकिन अधिकारियों की नाकामी से इन नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। हालात यह हैं कि किसानों को घटिया बीज मिल गया तो इसकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं होगा।

सोमवार को पत्रिका टीम इलाके के गांवों में पहुंची तो यहां दुकानो पर जगह जगह बीज व कीटनाशक भी बिकता मिला। किराणा की दुकानों पर खाद्य सामग्री के साथ ही कीटनाशक रखा हुआ था। जानकारी के मुताबिक बीज की बिक्री के लिए लाइसेंस लेना जरूरी होता है। लाइसेंस के लिए भी लंबी प्रक्रिया है और हर तीन साल बाद इसे रिन्यू करवाना पड़ता है।


खाद्य पदार्थों के साथ ही कीटनाशक
गांवों में कई जगह तो कीटनाशक भी खाद्य पदार्थों के साथ बिक रहा है। इससे कभी भी खाद्य सामग्री जहरीली हो सकती है। जबकि कीटनाशक का भी अलग से लाइसेंस जारी किया जाता है। बीएससी या इससे ऊपर की योग्यता रखने वाले दुकानदार ही इसका लाइसेंस ले सकते हैं। इसके बाद समय समय पर इनको अपना स्टॉक रजिस्टर व कीटनाशक की प्रामणिकता की जांच करवानी पड़ती है।


यहां बिक रहा था दुकानों पर बीज
पत्रिका टीम ने इलाके के कई गांवों का दौरा किया तो किराणा की दुकानों पर बीज की बिक्री हो रही थी।
इलाके के बारी, रोसावां, नारसरा, उदनसर, अलफसर, ढांढ़ण, रोसावां, रामसीसर सहित कई गांवों में दुकानों पर बीज पड़ा हुआ था। इसके साथ ही कीटनाशक भी बेचा जा रहा था।

घटिया बीज उम्मीदों पर फेरेगा पानी
किराणा की दुकानों पर बेचा जा रहे बीज की गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि कृषि विभाग इन दुकानों पर कोई जांच नहीं करता हैं। ऐसे में अगर बीज गुणवत्ता युक्त नहीं होगा तो बीज से किसानों की उमीदों पर पानी फिर सकता है। पूरे वर्ष तक क्षेत्र का किसान खरीफ की फसल बुआई का इंतजार करते है। बिना प्रमाणित बीज की बुआई से फसल खराब हो सकती है, ऐसे में किसानों की उमीदे धराशाही हो जाती है। इसके बाद किसानों को धरने प्रदर्शन करते पड़ते है। कर्ज लेकर किसान बुआई करते है बाद में फसल नहीं होने से भारी समस्या का सामना करना पड़ता है।


विभाग बना अनजान
खुलेआम बीज बिकने के मामले में कृषि विभाग अनजान बने है। कृषि अधिकारी शिव कटारिया का कहना है कि पिछले आठ दिनों से अभियान चला रखा है लेकिन कहीं भी बिना लाइसेंस की दुकानो पर बीज की बिक्री का मामला सामने नहीं आया है।

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