Rajasthan Textbook Syllabus Change: राजस्थान की स्कूलों में अब होगा नया पाठ्यक्रम, जानें क्या-क्या हुआ बदलाव

Vinod Singh Chouhan | Publish: May, 18 2019 12:21:09 PM (IST) | Updated: May, 18 2019 06:02:28 PM (IST) Sikar, Sikar, Rajasthan, India

सरहद पर हर युद्ध में दुश्मन के दांत खट्टे करने वाले शेखावाटी के वीर सपूतों को अब प्रदेश के नैनिहाल सैल्यूट करेंगे।

अजय शर्मा, सीकर.

सरहद पर हर युद्ध में दुश्मन के दांत खट्टे करने वाले शेखावाटी के वीर सपूतों को अब प्रदेश के नैनिहाल सैल्यूट करेंगे। राजस्थान की पाठ्य पुस्तकों में ( new syllabus in Rajasthan Schools ) पहली बार Congress सरकार ने शहीद ( Story of martyrs ) व सैनिकों के पाठ शामिल किए है। इसी सत्र से विद्यार्थियों Students को सैनिक व शहीदों के बारे में पढऩे को मिलेगा। कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में जुड़े ‘शौर्य परम्परा व राष्ट्रीय एकता’ नामक पाठ में प्रदेश के साथ शेखावाटी के शहीदों की वीर गाथाओं को अब पूरा प्रदेश पढ़ेगा। शिक्षा विभाग की पुस्तकों में सबसे ज्यादा शेखावाटी के शहीद, पदक विजेता और खिलाड़ी शामिल हुए है। प्रदेश के युवाओं को बॉर्डर फिल्म से लेकर क्रिकेट खिलाडिय़ों के बारे में भी पढऩे को मिलेगा।


इन सपूतों को किया पाठ्यक्रम में शामिल
कक्षा नवीं की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में ‘शौर्य परम्परा व राष्ट्रीय एकता’ नामक पाठ जोड़ा गया है। करगिल हीरो महावीर चक्र विजेता दिगेन्द्र सिंह व झुंझुनूं के मेजर पीरूसिंह के बारे में बताया गया है। सेना में रहकर विभिन्न क्षेत्रों में परचम लहराने वाले सूबेदार बजरंग ताखर, मेजर सुरेन्द्र पुनिया, डॉ. सुरेन्द्र भास्कर, झुंझुंनू की लड़ाकू विमान महिला पायलेट मोहाना सिंह, मेजर अंकिता चौधरी, सुबेदार ओमप्रकाश, दशरथसिंह आदि का जिक्र भी पुस्तक में किया गया है। सीकर के महावीर चक्र विजेता दिगेन्द्र कुमार ने कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए पांच गोली लगने के बावजूद भी 48 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और पाकिस्तानी सेना के मेजर अनवर का सर काट कर तिरंगा फहराया था।


सेना के जज्बे के आगे दलगत राजनीति किनारे पर
पाठ्यक्रम में बदलाव (Rajasthan Textbook Syllabus Change) को लेकर सवालों के घेरे में आने वाली सरकारों के लिए इस बार बड़ा उदाहरण भी है। नए पाठ्यक्रम में भाजपा सांसद और केन्द्रीय मंत्री ले. कर्नल राज्यवर्धन सिंह और आम आदमी पार्टी से पिछली बार सीकर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके मेजर डॉ. सुरेन्द्र पूनियां के खेलों में परचम लहराने का जिक्र किया गया है। हालांकि इस चुनाव में पूनियां ने भाजपा का दामन थामन लिया था। विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए सैन्य पदवियां प्राप्त प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी कपिल देव, महेन्द्रसिंह धोनी और सचिन तेंदुलकर के साथ 1971 के भारत-पाक युद्ध पर बनी फिल्म ‘बॉर्डर’ का भी जिक्र किया गया है। शिक्षा राज्य मंत्री डोटासरा का कहना है कि कांग्रेस की नीति भाजपा की तरह सेना के नाम पर राजनीति करने की नहीं अपितु सेना के शौर्य का सम्मान करने की रही है। कई शिक्षक संगठनों ने पाठ्यक्रम में सेना और शौर्य से जुड़े पाठों को शामिल करने की सराहना की गई है।


नहीं हटा पंडित दीनदयाल उपाध्याय का पाठ
पिछले कई दिनों से पाठ्यक्रम से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के पाठ को हटाने को लेकर सियासत हो रही है। लेकिन शुक्रवार को राजस्थान पत्रिका ने इस मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का पाठ इस साल भी विद्यार्थियों को पढऩे को मिलेगा। वहीं चित्तौडगढ़़ दुर्ग की कविता भी पुस्तक में है। इसमें पहले लगी फोटो को हटाकर अब दुर्ग की फोटो लगाई गई है।


इनके बारे में भी पढ़ेंगे बच्चे
सीएचएम पीरू सिंह शेखावत
मेजर शेतान सिंह
मेजर कुलदीप सिंह
बिगे्रडियर भवानी सिंह
लेफ्टिनेंट जनरल हनुत सिंह
कैप्टन महेन्द्र सिंह तंवर
डिफेडर सुल्तान सिंह राठौड़
सैकण्ड लेफ्टिनेंट पुनीत नाथ दत्त
कैप्टन करणी सिंह राठौड़
हवलदार अमर सिंह राठौड़
कर्नल सौरभ सिंह शेखावत
स्वाइड्रन लीडर अजय आहुजा
नायब सूबेदार रामपाल सिंह
मेजर भानु प्रताप सिंह
बिग्रेडियर गोविन्द सिंह राठौड़
बजरंग ताखर
सूबेदार ओमप्रकाश
मेजर अंकिता चौधरी


बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था
महावीर चक्र विजेता दिगेन्द्र सिंह ने पत्रिका से खास बातचीत में बताया कि यह काम जिसने भी किया है बहुत ही सराहनीय है। अब इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। हम पुराने युद्ध व अन्य जानकारी देकर बच्चों को क्या पढ़ाना चाहत है। पहली बार शहीद व सैनिकों के बारे में पुस्तकों में कुछ लिखा गया है। इससे युवाओं को फायदा मिलेगा।


शेखावाटी के जर्रे-जर्रे में शौर्य और शहादत
देश की सीमाओं पर जब भी दुश्मन ने आंख उठाने की कोशिश की तो राजस्थान की धरती के युवाओं ने हमेशा करार जवाब देने का काम किया है। इसमें सीकर, चूरू व झुंझुनूं के युवा भी पीछे नहीं रहे है। महावीर चक्र विजेता विजेता दिगेन्द्र सिंह सहित सैकड़ों ऐसे नाम है जिन्होंने दुश्मन के दांत खट्टे करने का काम किया है। हम हमारी युवा पीढ़ी को यह गौरवमयी इतिहास पढ़ाना चाहते है, इसलिए यह कदम उठाया है। गोविंद सिंह डोटासरा, शिक्षा राज्यमंत्री ( Govind Singh Dotasra )


वर्षो पुरानी मांग पूरी: गौरव सेनानी
गौरव सेनानी शिक्षक मदन गढ़वाल का कहना है कि प्रदेश के सैनिक लंबे अर्से से मांग कर रहे थे कि सैनिकों के संघर्ष व शहादत के पाठ जोड़े जाए, लेकिन कभी ध्यान नहीं दिया। इस बार सैनिकों के शौर्य को शामिल किया गया है। सरकार का यह सराहनीय कदम है। कक्षा पांच से कॉलेज तक की पुस्तकों में भी कुछ हिस्सा जुडऩा चाहिए।


शेखावाटी ( Shekhawati ) की पहचान सैनिकों से: पूनियां
मेजर सुरेन्द्र पूनियां ने बताया कि शेखावाटी पूरी दुनिया में सैनिकों की वजह से पहचान है। यहां की माटी में शौर्य और शहादत के असख्य किस्से है। युवा अपना ऑइकान समाज से ही बनाना चाहता है। सैनिक और शहीद भी समाज का हिस्सा है। यदि पाठ्यक्रम में सैनिकों और शहीदों को शामिल किया है तो यह बेहद ही गर्व करने वाली बात है। सैनिकों ने हमेशा देश का मान बढ़ाने का काम किया है। सैनिकों को तरहीज मिलने की जानकारी सुनकर काफी खुशी है।


बेटियों को मिले हाईटेक शिक्षा
विभिन्न संगठनों से जुड़ी विमला विश्नोई का कहना है कि पुस्तकों को लेकर जिस तरह की सियासत हो रही है वह बेहद ही दुर्भायपूर्ण है। जिस तरह से कई लोग एक टॉपिक को लेकर विरोध कर रहे है, वह इस दौर में चर्चा का विषय होना ही नहीं चाहिए। क्योकि आज बेटियों के सामने चुनौती कुछ अलग है। पुस्तकों को राजनीति का जरिया बनाना गलत है।


सेना की शिक्षा ( Education ) मिलनी चाहिए : भास्कर
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में सहायक निदेशक डॉॅॅ. सुरेन्द्र भास्कर का कहना है कि युवाओं को सैन्य शिक्षा मिलनी चाहिए। सैनिक कठिन परिस्थतियों में भी ईमानदारी से कर्तव्य निभाते हुए हर क्षेत्रों में परचम लहरा रहे है। उम्मीद है देश के इन असली नायकों की कहानियां बालकों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करेगी। सरकार का यह प्रयास काफी सराहनीय है। इससे युवाओं को सेना को समझने का मौका भी मिलेगा।
पुलवामा के वीरों के नाम भी
चर्चित पुलवामा हमले में प्राणों की बाजी लगाने वाले राजस्थान के पांच वीरों को इस साल किताबों में शामिल किया है। इसमें रोहिताश लाम्बा, भागीरथ, नारायण लाल गुर्जर, जीतराम गुर्जर तथा हेमराज मीणा के उल्लेख के साथ विंग कमांडर अभिनन्दन की बहादुरी का वर्णन भी किया गया है।

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