
इसलिए हर माह 45 नवजात जन्म प्रमाण पत्र से हो रहे वंचित
सीकर. सरकारी जनाना अस्पताल में गर्भधारण के दौरान आने वाली महिलाएं व आशा सहयोगिनियों की ओर से आधे अधूरे दस्तावेज जमा करवाने के कारण कई नवजातों को जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है। कई गर्भवती महिलाएं प्रसव के बाद भी अपने भर्ती फार्म में ससुराल की बजाए पीहर पक्ष का नाम लिखवा रही है। इसी कारण ऑनलाइन एंट्री किए जाने के दौरान ऐसे फार्म निरस्त हो रहे हैं।
हर माह 45 नवजात वंचित
हर माह ऐसे 45 नवजात जन्म प्रमाण पत्र से वंचित हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से वापस प्रसूता के परिजन से आधार कार्ड मंगवाया जा रहा है। इसके बाद नए फार्म अपलोड किए जा रहे हैं। इससे समय की बर्बादी होने के साथ ही पुराने फार्म का लोड बढ़ रहा है। गौरतलब है कि वर्तमान में जनाना अस्पताल में प्रसूताओं को डिस्चार्ज से पहले कागजात लिए जाते हैं। इसके बाद कल्याण अस्पताल से जन्म एंव पूर्व नवजातों के जन्म प्रमाण पत्र बनाकर दिए जाने की व्यवस्था शुरू की गई है।
साफ्टवेयर से निरस्त
प्रसव के दौरान या डिस्चार्ज के समय भर्ती टिकट में पूरे दस्तावेज नहीं लगे होने से रोजाना सैकड़ों फार्म को डाटा एंट्री सॉफ्टवेयर निरस्त कर रहा है। गायनी यूनिट में लगाए ऑपरेटरआधे अधूरे दस्तावेजों को लेकर परेशान हैं। ऑपरेटर व गायनी यूनिट से जुड़े कर्मचारियों ने पूर्व में शिकायत दी लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ।
पता ससुराल का आधार पीहर का
प्रसव के दौरान भर्ती होने वाली प्रसूता का पता गायनी यूनिट के रजिस्टर व भर्ती टिकट में ससुराल का लिखा जा रहा है, जबकि आधार कार्ड में पिता का नाम व गांव का पता लिखा हुआ है। अलग-अलग नाम पते से सॉफ्टवेयर ऐसी प्रसूताओं व नवजात की एंट्री ही नहीं ले रहा।
निरस्त होते ही फिर चलेगी प्रक्रिया
सॉफ्टवेयर में किसी गर्भवती या नवजात का नाम निरस्त होने के बाद नाम जुड़वाने व प्रमाण पत्र के लिए अड़चने आती है। सारी प्रक्रिया नगर परिषद से चलती है।
Updated on:
06 Jun 2018 05:54 pm
Published on:
06 Jun 2018 05:45 pm
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