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ऑस्कर अवार्ड के लिए नोमिनेट फिल्म के डायरेक्टर पीपलवा को थी फिल्मों से नफरत, सिनेमा के खिलाफ लिख चुके थे कई आर्टिकल

तीन नेशनल व 31 इंटरनेशनल अवार्ड पाने के साथ ऑस्कर अवार्ड के लिए नोमिनेट हुई मूवी नाचोया कंपासर के निर्देशक राधेश्याम पीपलवा को कभी फिल्मों से नफरत थी।

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सीकर

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Sachin Mathur

Feb 03, 2020

ऑस्कर अवार्ड के लिए नोमिनेट फिल्म के डायरेक्टर पीपलवा को थी फिल्मों से नफरत, सिनेमा के खिलाफ लिख चुके थे कई आर्टिकल

ऑस्कर अवार्ड के लिए नोमिनेट फिल्म के डायरेक्टर पीपलवा को थी फिल्मों से नफरत, सिनेमा के खिलाफ लिख चुके थे कई आर्टिकल

सीकर. तीन नेशनल व 31 इंटरनेशनल अवार्ड पाने के साथ ऑस्कर अवार्ड के लिए नोमिनेट हुई मूवी नाचोया कंपासर के निर्देशक राधेश्याम पीपलवा को कभी फिल्मों से नफरत थी। सीकर के फतेहपुर निवासी राधेश्याम बताते हैं कि वह एक स्पोट्र्स मैन थे और रोज बेडमिंटन खेलते थे। इस दौरान उनके साथ देर रात तक मूवी देखने के कारण टाइम पर ग्राउंड नहीं पहुंचते थे। इस पर उन्हें मूवी से नफरत हो गई थी। फिल्मों के खिलाफ उन्होंने कई आर्टिकल भी लिखे थे। लेकिन, बाद में वही फिल्म उनका भाग्य बदलने वाले रही। 300 से ज्यादा एड फिल्म बनाकर वल्र्ड फेमस हो चुके पीपलवा की फिल्म रिलीज होने से पहले ही जयपुर लिटरेचर फेस्टीवल सहित कई इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर धूम मचा चुकी है। पेश है पत्रिका से पीपलवा की बातचीत के खास अंश..

स: क्या शुरू से फिल्म का शैाक था?
ज. नहीं! मैं स्पोट्र्स मैन था। देर तक मूवी देखने की वजह से कई प्लेयर सुबह ग्राउंड पर टाइम पर नहीं पहुंचते थे। इससे मुझे सिनेमा से नफरत हो गई थी। मैंनें इसके खिलाफ आर्टिकल भी लिखे। लेकिन, 1996 में जब काम के लिए मुंबई गया तो एड एजेंसी में काम शुरू किया और सफर उसी सिनेमा तक पहुंच गया।

स : क्या सब कुछ इजीली हो गया?
ज. बहुत स्ट्रगल करना पड़ा। केल्शियम की कमी की वजह से पहले स्पोट्र्स में प्रॉब्लम फेस की। पापा के सपोर्ट से जैसे- तैसे बैंडमिंटन का नेशनल प्लेयर बना। आरएएस की तैयारी के लिए जयपुर गया तो कुछ अलग करने की चाह मुंबई ले गई। यहां पहुंचा तो इंडस्ट्री का सपोर्ट नहीं मिला। लेकिन, बस हार नहीं मानी। चार हजार रुपए की एडफिल्म से काम शुरू किया और अब सवा करोड़ रूपये की एड फिल्म तक पहुंच गया हूं।


स. - चिड़ी बल्ला फिल्म का आइडिया कैसे आया?
ज. मुंबई पहुंचने के बाद से राजस्थानी आर्ट व कल्चर पर कुछ करना चाहता था। गोवा के म्युजिशियन की स्टोरी पर बनी फिल्म जब ऑस्कर तक पहुंची तो होंसला ओर बढ़ गया। इसके बाद ही मैंने राजस्थान पर कुछ करने की मन में ठान चिड़ी बल्ला की स्टोरी लिखना शुरू कर दिया।

स. लाइफ का स्पेशल मोमेंट कौनसा रहा?
ज. यूं तो ऑल टाइम स्पेशल है। फिर भी नाचोया कंपासर का ऑस्कर के लिए नोमिनेशन सबसे स्पेशल मोमेंट रहा। फिल्म का न्यूयार्क फिल्म फेस्टीवल में ओपनिंग फिल्म के रूप में दिखाया जाना व हालिया मेरी एक एड फिल्म में महानायक अमिताभ बच्चन का काम करना भी मेरे लिए बहुत स्पेशल रहा।

स. - आपकी फिल्मों को इतने अवार्ड मिले, कैसे देखते हैं इन्हें?
ज. - सही तो यह है कि इतने अवाड्र्स के बारे में कभी सोचा भी नहीं था। हमेशा यही सोचा कि बॉक्स ऑफिस की इतिहास को तोडऩे- मरोडऩे की परंपरा से इतर लोगों
तक ट्रू स्टोरी पहुंचाउं। शायद यही वजह भी है कि मेरी फिल्म को इंडिया ही नहीं पूरे वल्र्ड में अप्रीशीएशन मिल रहा है।

स. - यूथ के लिए क्या मैसेज है?
ज. माइंड ओपन व ब्रॉड रखो। फेल होने का डर मन से निकाल दो। जिसमें इंट्रेस्ट है वह काम डेडिकेशन से करो। सक्सेस जरूर मिलेगी।

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