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NEET UG 2026 Paper Leak: नीट पेपर लीक मामले में कन्सलटेंसी की भूमिका सामने आने के बाद एक बार फिर देशभर में तेजी से फैल रहे कन्सलटेंसी नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं। जाली अंकतालिका से लेकर भर्ती परीक्षाओं और अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा तक में कथित रूप से कन्सलटेंट्स की संलिप्तता सामने आने के बावजूद इनके पंजीयन और आर्थिक गतिविधियों को लेकर कोई ठोस सरकारी व्यवस्था नहीं है। पीटीआई, फायरमैन, एनटीटी सहित कई भर्ती परीक्षाओं में जाली अंकतालिकाओं के मामलों में भी कई कन्सलटेंसी चर्चा में रही थीं।
इसके बाद पुलिस मुख्यालय स्तर से सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्र में संचालित कन्सलटेंसी संस्थानों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार कन्सलटेंसी के लिए पंजीयन और निगरानी व्यवस्था लागू करे तो फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
जांच एजेंसियों को पिछले साल चयनित कुछ विद्यार्थियों को लेकर भी शिकायतें मिली हैं। खासतौर पर एक ही परिवार के कई विद्यार्थियों के चयनित होने के मामलों में एसओजी ने रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया है। जांच में यह देखा जा रहा है कि संबंधित विद्यार्थियों या परिवारों का पेपर माफिया से कोई पुराना संबंध तो नहीं रहा।
नीट परीक्षा का कथित 'गेस पेपर' परीक्षा से एक दिन पहले तक बिकने की सूचना एसओजी को मिली है। जांच एजेंसियों को विद्यार्थियों से मिली जानकारी के आधार पर आशंका है कि पेपर सोशल मीडिया के साथ-साथ ऑफलाइन माध्यम से भी कई जगहों पर बांटा गया।
सरकार को कन्सलटेंसी के पंजीयन को लेकर नियम कायदे तय करने चाहिए। इससे युवाओं को फायदा मिलने के साथ सरकार की आय में भी इजाफा हो सकेगा। कई कन्सलटेंसी में विशेषज्ञों की टीम के नहीं होने के बाद कई बार युवाओं को आधी-अधूरी जानकारी दे दी जाती है जिससे फायदे की जगह नुकसान हो जाता है।
हितेश शर्मा, कॅरियर काउंसलर
Published on:
15 May 2026 02:16 pm
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