
भरभराकर गिरी पत्थर की खदान। फोटो: पत्रिका
Sikar Mine Collapse: सीकर। नीमकाथाना उपखंड क्षेत्र के गांव टोडा के पास झिरंडा क्षेत्र स्थित पत्थर खदान में गुरुवार शाम भूस्खलन होने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे के दौरान खदान में कार्य कर रहे चार श्रमिक मलबे में दब गए। इनमें से तीन श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया, जबकि एक श्रमिक के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है। प्रशासन ने देर रात तक राहत एवं बचाव कार्य की तैयारी जारी रखी।
जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम खदान में पत्थर निकालने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान अचानक भूस्खलन होने से बड़े पत्थर और भारी मलबा नीचे आ गिरा। हादसे के बाद मौके पर अफरा तफरी मच गई। वहां मौजूद अन्य श्रमिकों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और भगत सिंह, चैन सिंह एवं विक्रम सिंह को मलबे से बाहर निकालकर कोटपूतली के एक निजी अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों के अनुसार तीनों की हालत स्थिर बनी हुई है।
वहीं प्रतापगढ़ निवासी दयाराम के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे के दौरान खदान में मौजूद दशरथ सिंह मौके से फरार हो गया। भूस्खलन में दो एलएनटी मशीनें और एक डंपर भी मलबे में दब गए। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
एएसपी लाकेश मीणा, पुलिस उपाधीक्षक सुशील मान, तहसीलदार देवीलाल चौधरी तथा सदर थाना प्रभारी राजेश कुमार पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इधर, देर शाम अंधेरा होने और तेज आंधी चलने के कारण रेस्क्यू अभियान शुरू करने में परेशानी आई। प्रशासन का कहना है कि मौसम अनुकूल होते ही राहत एवं बचाव कार्य तेज किया जाएगा। हादसे के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।
भूस्खलन की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी है। जुलाई 2022 में पाटन के रैला गांव की खदान में भूस्खलन से दो मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि सितंबर 2025 में डोकन क्षेत्र की खदान में तीन मजदूर दब गए थे, जिनमें दो की जान चली गई। लगातार हो रहे हादसों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि समय रहते सुरक्षा मानकों की सख्ती से पालना नहीं करवाई गई तो आने वाले समय में और बड़े हादसे होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
Published on:
15 May 2026 09:35 am
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