12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Dabla News: प्रशासन ने चारागाह भूमि से रास्ता काटने पर राजस्थान के इस गांव में विरोध शुरू

डाबला में चारागाह भूमि में रास्ता काटने को लेकर एसडीएम की रिपोर्ट में रास्ते को सार्वजनिक प्रयोजनार्थ बताया जरूरी, जनसुनवाई में कलक्टर से मिले ग्रामीण, बताई पीड़ा

2 min read
Google source verification

सीकर

image

Mukesh Kumawat

Jun 17, 2022

Dabla News: प्रशासन ने चारागाह भूमि से रास्ता काटने पर राजस्थान के इस गांव में विरोध शुरू

Dabla News: प्रशासन ने चारागाह भूमि से रास्ता काटने पर राजस्थान के इस गांव में विरोध शुरू

नीमकाथाना/मावंडा. अधिकारी चाहे तो नहीं होने वाले काम का भी रास्ता खोज निकालते है और होने वाले कार्य में कोई भी पैच फंसाकर उसको रोक देते हैं। ऐसा ही समीपवर्ती गांव डाबला में एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला प्रशासन ने स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर जिस तरह से माफिया को पनाह देने के लिए रास्ता काटा है ग्रामीण उसके विरोध में है। गुरूवार को सीकर में हुई जिलास्तरीय जनसुनवाई में जयराम सिंह के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिला कलक्टर को मामले से अवगत करवाया तथा रास्ता नहीं निकालने की मांग रखी। गौरतलब है कि डाबला इलाके में बड़ी मात्रा में खनिज संपदा का भंडार है। यहां वर्ष 2011 में भी माफिया ने क्रेशर व खनन शुरू करने के दौरान प्रशासन ने परिवहन के लिए चारागाह भूमि से रास्ता काटने के आदेश जारी किया था। जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया था। अंत में तत्कालीन जिला कलक्टर धर्मेन्द्र भटनागर को काटे गए रास्ते के आदेश को निरस्त करना पड़ा, तब जाकर आंदोनल शांत हुआ। वर्षों गुजरने के बाद अवैध खनन व भारी ब्लास्टिंग में चर्चा में रहा डाबला गांव में फिर माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए प्रशासन ने ग्रामीणों को दरकिनार कर रास्ता काट काटने के आदेश जारी कर दिए।

अधिकारियों ने इस तरह निकाला रास्ता

उपखंड प्रशासन ने तहसीलदार की रिपोर्ट पर डाबला में सार्वजनिक रास्ता निकालने के लिए आरक्षित (सेट अपार्ट) एवं इसकी क्षतिपूर्ति के लिए गांव में ही बंजर भूमि में से चारागाह दर्ज किए जाने के प्रस्ताव भेजकर अभिशंषा की। साथ ही रास्ते को सार्वजनिक प्रयोजनार्थ सेट अपार्ट करना नितांत आवश्यक बताया। जिस पर जिला कलक्टर ने पंचायत डाबला में रकबा 0.82 हैक्टेयर भूमि चारागाह से पृथक कर 30 फीट चौड़े रास्ते के लिए आरक्षित (सेट अपार्ट) किया। वहीं चारागाह भूमि की क्षतिपूर्ति के लिए खसरा नंबर 1740/2 रकबा 2.17 हेक्टेयर किस्म बंजर में से 0.82 हेक्टेयर किस्म बंजर को चारागाह घोषित करने के आदेश जारी कर दिए।

एसडीएम कार्यालय के बाहर चला था अनशन

वर्ष 2011 में रास्ता काटने पर उस समय ग्रामीणों ने आंदोलन किया था। ग्रामीण उपखंड कार्यालय के सामने कई दिनों तक अनशन किया। कई अनशनकारियों की तबीयत भी खराब हो गई थी। महिलाएं भी अनशनकारियों के समर्थन में उतर कर धरने में शामिल हुई थी। अंत में प्रशासन ने चारागाह भूमि से रास्ता काटने का फैसला वापस लिया। फिर भी कई दिनों तक आंदोलन जारी रहा। उधर एसडीएम बृजेश गुप्ता ने कहा कि तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा गया है।