
सीकर. किसान नेता अमराराम जयपुर सेंट्रल जेल से रिहा होकर शुक्रवार रात करीब पौने एक बजे सीकर में जयपुर रोड (एनएच 52) पर जाम स्थल रामूकाबास पहुंचे। सीकर किसान आंदोलन के हीरो के स्वागत में किसानों ने पलक पांवड़े बिछा दिए। इसके बाद अमराराम ने किसानों को सम्बोधित करते हुए रामूकाबास से जाम हटाने और शनिवार 24 फरवरी को प्रस्तावित राजस्थान चक्काजाम स्थगित कर दिया।
जेल से छूटकर आने के बाद किसान नेता व पूर्व विधायक अमराराम ने राजस्थान पत्रिका डॉट कॉम से विशेष बातचीत की। अमराराम ने बताया कि वे कॉलेज लाइफ से ही हक के लिए शासन और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाना शुरू कर दिया था। वर्ष 1997 में किसान आंदोलन से जुड़ गया। इसके बाद कभी पीछे मुडकऱ नहीं देखा। चाहे जयपुर के अमरुदों के बाग का प्रदर्शन हो या रावला-घड़साना किसान आंदोलन। हर बार किसानों के साथ-साथ कंधे स कंधा मिलाकर खड़ा और सरकार को झुकाकर ही दम लिया।
माकपा नेता अमराराम ने बताया कि वर्ष 1997 से 2018 तक इन 21 सालों में किसान आंदोलन के कारण कभी गिरफ्तारी नहीं हुई। ये बात अलग है कि हमने कई बार हमारे आंदोलन की रणनीति के हिसाब से गिरफ्तारियां दी हैं, मगर किसानों के सम्पूर्ण को लेकर 22 फरवरी 2018 को प्रस्तावित विधानसभा घेराव के कारण सरकार ने गिरफ्तार लिया।
अमराराम की मानें तो पिछले 21 साल में उनकी यह पहली गिरफ्तारी है। खास बात यह रही कि राजस्थान सरकार ने अमराराम व अन्य किसान नेताओं को किसी डाकू की तरह किया है। इस बात पर अमराराम कहते हैं कि 20 फरवरी की दोपहर को सीकर की धोद विधानसभा क्षेत्र के मांडोता गांव किसानों के जत्थे के साथ जयपुर कूच कर रहे थे।
हम 50-60 किसान साथी जत्थे के साथ कालाडेरा थाना इलाके में पहुंचे तो हमें करीब 250 हथियारबंद पुलिसकर्मी मिले। उनके पास स्टैनगन तक थी। वे हमें गिरफ्तार करने आए थे। ऐसा लग रहा कि हम कोई किसान या गरीब की आवाज उठाने वाले नहीं बल्कि डाकू या कोई चोर हैं। इसके बाद चार दिन तक जयपुर सेंट्रल में रखा गया।
अमराराम ने कहा कि राजस्थान सरकार किसी आंदोलन से पहले नेताओं को ढूंढ-ढूंढकर कर गिरफ्तारी का नया प्रयोग किया था, जो सही साबित नहीं हुआ। अमराराम, पेमाराम समेत 169 किसान नेताओं की गिरफ्तारी के बाद जिस तरह माकपा कार्यकर्तााओं, ‘अमराराम की सेना’ और किसानों समेत अन्य संगठनों ने जिस तरह से आंदोलन को आगे बढ़ाया। उसे देख सरकार को पीछे हटना पड़ा और किसान नेताओं को रिहा किया।
पहली रात में जेल का खाना नहीं खाया
अमराराम ने बताया कि जयपुर सेंट्रल जेल में चार दिन बिताए। ये दिन जिंदगी में कभी नहीं भूल पाउगा। खाना तक सही नसीब नहीं हुआ। दाल में सिर्फ पानी था। पूरे टैंक में दाल का एक भी दाना नहीं था। रोटियां प्लास्टिक के कट्टे में भरकर लाई गई। हम सभी 84 साथियों ने पहली रात को खाना खराब गुणवत्ता को होने के कारण खाया ही नहीं।
Published on:
24 Feb 2018 12:40 pm
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