
संदीप हुड्डा सीकर. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज का ख्वाब देखा था, मगर राजस्थान में उसकी
हकीकत बेहद कड़वी है। हर बार सरकारें यह दावा करती हैं कि पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त बनाया जाए। गांव के फैसले चौपाल पर ही लिए जाएंगे। हर बार कहा जाता है कि गांव की चौपाल ही गांव के विकास का खाका तय करेगी। लेकिन जब चौपालें ही नहीं लगे तो आखिर विकास कैसे तय होगा। गांवों के वार्डों में होनी वाली वार्ड सभाएं तो मानो लुप्त ही हो चुकी हैं।
पूरे प्रदेश में पिछले दो साल में महज आठ फीसदी वार्ड सभाएं भी नहीं हुई। कई जिले तो ऐसे हैं जहां एक भी वार्ड सभा नहीं हुई। सीकर में भी एक फीसदी वार्ड सभाएं भी आयोजित नहीं की गई। पूरे प्रदेश में चार लाख 30 हजार 828 वार्ड सभाएं होनी थी। लेकिन महज 32359 सभाएं ही हुई र्है। जानकारी के मुताबिक हर ग्राम पंचायत के हर वार्ड में एक साल में 2 वार्ड सभाओं का आयोजन करना अनिवार्य होता है। अगर प्रदेश के आंकड़ें खंगाले जाए तो बहुत ही चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। जिसमें साल में दो बार वार्ड सभा का आयोजन तो दूर हजारों वार्ड ऐसे हैं जहां एक बार भी वार्ड सभा आयोजित नहीं की गई।
यह हैं वार्ड सभा का आयोजन करने के नियम
राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 3 की उपधारा 2 के तहत हर ग्राम पंचायत के हर वार्ड में वार्ड सभाएं करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत प्रत्येक वार्ड में एक वर्ष में कम से कम दो वार्ड सभाएं आयोजित करना अनिवार्य है।
क्या होता है वार्ड सभा में
वार्ड सभा ग्राम सभा का ही छोटा रूप है। इसमें वार्ड पंच के अलावा पंचायत के जनप्रतिनिधी व ग्राम सेवक और अन्य कर्मचारी शामिल होते हैं। इसमें वार्ड के विकास व समस्याओं पर चर्चा होती है और प्रस्ताव बनाकर पंचायत को भेजा जाता है। पंचायत को उस प्रस्ताव का काम करवाना होता है।
प्रदेश में वार्ड सभाओं के हाल
2015 में पंचायतीराज चुनावों के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की 9875 ग्राम पंचायतों में एक लाख 7 हजार 707 वार्ड हैं। हर वार्ड में एक साल में दो वार्ड सभाएं होनी थी। ऐसे में पूरे प्रदेश में चार लाख 30 हजार 828 वार्ड सभाएं होनी थी। जबकि पिछले दो साल में महज 32359 वार्ड सभाएं हुई और इनमें से भी 15 हजार सभाएं तो अकेले उदयपुर जिले की हैं।
सीकर में 17 हजार में से 19 सभाएं ही
सीकर जिले में 343 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें 4271 वार्ड हैं। इन सभी वार्डों में 17084 वार्ड सभाएं होनी थी, लेकिन पिछले दो साल में महज 19 सभाएं ही आयोजित की गई। यह आंकड़ा तो एक फीसदी भी नहीं है। इस दौरान पंचायत समिति फतेहपुर, दांतारामगढ़ व नीमकाथाना में चार चार, खंडेला, श्रीमाधोपुर व पिपराली में दो दो और पाटन में एक बार वार्ड सभा आयोजित हुई। लक्ष्मणगढ़ व धोद में एक भी वार्ड सभा का आयोजन नहीं हुआ।
Published on:
08 Sept 2017 11:43 am
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