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ईरान-इजरायल युद्ध में सीकर के विक्रम की मौत, बहनों की शादी के लिए गया था कमाने, शव देख चीख उठीं बहनें, ‘भैया किसके भरोसे छोड़ गए’

Rajasthan Youth Death in Oman: सीकर के विक्रम वर्मा की ओमान में ड्रोन हमले में मौत हो गई। वह 23 फरवरी को मजदूरी के लिए गया था। हमले से एक दिन पहले परिवार से आखिरी बार बात की थी।

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सीकर

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Arvind Rao

Mar 18, 2026

Iran-Israel-US War Sikar Youth Death

ईरान-इजरायल युद्ध में सीकर के विक्रम की मौत (फोटो- पत्रिका)

Iran-Israel-US War Sikar Youth Death: पश्चिम एशिया में छिड़ी युद्ध की आग अब राजस्थान के घरों के चिराग बुझाने लगी है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने सीकर जिले के एक साधारण परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली हैं।

बता दें कि रोजी-रोटी कमाने ओमान गए सीकर के 22 वर्षीय युवक विक्रम वर्मा की ड्रोन हमले में दर्दनाक मौत हो गई। मंगलवार को जब विक्रम का पार्थिव शरीर उसके पैतृक गांव अगलोई पहुंचा, तो पूरे इलाके में मातम छा गया।

23 फरवरी को उड़ान, 13 मार्च को मौत

सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र का रहने वाला विक्रम वर्मा महज 20 दिन पहले ही (23 फरवरी को) सुनहरे भविष्य के सपने लेकर ओमान पहुंचा था। वह वहां एक निर्माण कंपनी में सड़क परियोजनाओं पर काम कर रहा था।

किसे पता था कि जिस रेगिस्तान में वह पसीना बहाकर अपनी बहनों की शादी के लिए पैसे जुटाने गया है, वही उसकी कब्रगाह बन जाएगा। 13 मार्च को हुए एक भीषण ड्रोन हमले में विक्रम गंभीर रूप से घायल हो गया और उसने दम तोड़ दिया।

आखिरी वीडियो कॉल: यहां हालात ठीक नहीं हैं…

मौत से ठीक एक दिन पहले 12 मार्च की रात विक्रम ने अपने परिवार से वीडियो कॉल पर बात की थी। उसने घर वालों को बताया था कि वहां युद्ध जैसे हालात हैं और तनाव लगातार बढ़ रहा है। उसने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई थी।

परिवार ने उसे ढांढस बंधाया था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि विक्रम की यह आवाज वे आखिरी बार सुन रहे हैं। घटना की सूचना उसके ममेरे भाई ने दी, जो उसी कंपनी में दूसरी जगह कार्यरत था।

उजड़ गया परिवार: पीछे छोड़ गया बीमार मां और तीन बहनें

विक्रम अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके कंधे पर पूरे घर की जिम्मेदारी थी। विक्रम की मां पिछले 6 महीनों से बिस्तर पर हैं। तीन बहनों में वह इकलौता भाई था। बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी, लेकिन दो छोटी बहनों की पढ़ाई और शादी का खर्च उठाने के लिए ही उसने विदेश जाने का जोखिम उठाया था।

पिता की कमाई कम थी, इसलिए परिवार पर पहले से ही कर्ज था। विक्रम को लगा था कि ओमान जाकर वह सारा कर्ज उतार देगा, लेकिन अब परिवार पूरी तरह टूट चुका है।

ब्यावर के पप्पू सिंह ने भी गंवाई जान

इस युद्ध की चपेट में सिर्फ विक्रम ही नहीं आया। ब्यावर जिले के रायपुर उपखंड के लालपुरा निवासी पप्पू सिंह की भी इसी हमले में मौत हो गई। पप्पू भी विक्रम के साथ 23 फरवरी को ही ओमान गया था। मंगलवार को दोनों युवकों के शव फ्लाइट से जयपुर लाए गए और फिर एम्बुलेंस के जरिए उनके गांवों तक पहुंचाए गए।

नम आंखों से अंतिम विदाई

मंगलवार को अगलोई गांव में गमगीन माहौल में विक्रम का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में सैकड़ों ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर ग्रामीण की आंख नम थी और गुस्सा भी, कि कैसे दो देशों की जंग में एक निर्दोष भारतीय मजदूर की जान चली गई। चिता को मुखाग्नि देते समय परिजनों की चीख-पुकार ने वहां मौजूद हर शख्स का दिल दहला दिया।