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जयपुर: साढ़े 5 साल से कोमा में कांस्टेबल पति, सरकार ने रोक लिया वेतन, हाईकोर्ट की फटकार के बाद मिली बड़ी राहत

Constable Narendra Singh Sisodia: हाईकोर्ट ने ड्यूटी के दौरान दुर्घटना के चलते 2021 से कोमा में चल रहे कांस्टेबल और परिजन को राहत दी। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार विशेष असमर्थता अवकाश मंजूर कर अगस्त 2021 से वेतन का भुगतान करे।

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जयपुर

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Arvind Rao

Mar 18, 2026

Rajasthan High Court Orders Salary Disability Leave for Constable in Coma Since 2021 Family Gets Relief

कोमा में चल रहे कांस्टेबल, साथ में उनकी पत्नी (फोटो- पत्रिका)

Constable Narendra Singh Sisodia in Coma: जयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय ने कर्तव्य पालन के दौरान गंभीर दुर्घटना का शिकार होकर साढ़े पांच साल से कोमा में चल रहे एक कांस्टेबल और उसके संघर्षरत परिवार के पक्ष में एक बड़ा और मानवीय निर्णय सुनाया है।

अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पीड़ित कांस्टेबल को 'विशेष असमर्थता अवकाश' स्वीकृत किया जाए और अगस्त 2021 से रुका हुआ पूरा वेतन चार सप्ताह के भीतर जारी किया जाए।

क्या है पूरा मामला?

यह संवेदनशील मामला कांस्टेबल नरेंद्र सिंह सिसोदिया से जुड़ा है। न्यायाधीश आनंद शर्मा ने उनकी पत्नी शारदा कंवर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा मालपुरा ने कोर्ट को बताया कि नरेंद्र सिंह 22 अगस्त 2021 को ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान उनकी मोटरसाइकिल का टायर अचानक फट गया, जिससे वे भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गए।

इस दुर्घटना में नरेंद्र सिंह के सिर में गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण वे कोमा में चले गए। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे लगभग दो साल तक अस्पताल में भर्ती रहे और वर्तमान में 85 फीसदी विकलांगता के साथ घर पर ही जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।

विभाग की लापरवाही और परिवार का संघर्ष

अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि पति के कोमा में जाने के बाद घर की आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई। शारदा कंवर ने पुलिस विभाग के चक्कर लगाए और पति का वेतन व विशेष असमर्थता अवकाश स्वीकृत करने की गुहार लगाई।

हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) और संबंधित थानाधिकारी ने भी कांस्टेबल को 'ऑन ड्यूटी' मानते हुए गृह विभाग को अवकाश स्वीकृति का प्रस्ताव भेजा था। इसके बावजूद, प्रशासनिक सुस्ती के चलते न तो अवकाश मंजूर हुआ और न ही पिछले साढ़े पांच वर्षों से वेतन का भुगतान किया गया।

अदालत की कड़ी टिप्पणी और आदेश

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने माना कि जब कर्मचारी ऑन ड्यूटी दुर्घटना का शिकार हुआ है, तो उसे नियमानुसार लाभ मिलना ही चाहिए।

न्यायालय के मुख्य निर्देश

  • राज्य सरकार कांस्टेबल नरेंद्र सिंह के लिए तुरंत 'विशेष असमर्थता अवकाश' मंजूर करे।
  • अगस्त 2021 से अब तक का जितना भी बकाया वेतन है, उसका भुगतान प्रार्थिया को किया जाए।
  • इस पूरी प्रक्रिया को आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए।

इस फैसले से न केवल सिसोदिया परिवार को आर्थिक संबल मिलेगा। बल्कि यह उन सरकारी कर्मचारियों के लिए भी एक नजीर हैस जो ड्यूटी के दौरान अनहोनी का शिकार हो जाते हैं और सिस्टम की फाइलों में उलझ कर रह जाते हैं।