
Bhanwar Jitendra Singh - File PIC
राजस्थान की राजनीति के सबसे शालीन और दिग्गज चेहरों में शुमार भंवर जितेंद्र सिंह ने आज एक ऐसा फैसला लिया, जिसने दिल्ली से लेकर जयपुर तक के राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी है। असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के तुरंत बाद, भंवर जितेंद्र सिंह ने असम के प्रभारी महासचिव के पद से अपना इस्तीफा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंप दिया है।
असम में कांग्रेस के प्रदर्शन से आहत भंवर जितेंद्र सिंह ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी सार्वजनिक की है। उन्होंने पत्र में बेहद मार्मिक और स्पष्ट शब्दों का प्रयोग किया:
इस्तीफे के साथ ही भंवर जितेंद्र सिंह ने असम के लोगों, वहां के कार्यकर्ताओं और नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि असम में बिताया गया समय और वहां से मिला प्यार उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।
असम विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा नीत एनडीए ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है।
अलवर के पूर्व सांसद और गांधी परिवार के बेहद करीबी माने जाने वाले भंवर जितेंद्र सिंह का राष्ट्रीय पद से इस्तीफा देना राजस्थान कांग्रेस के लिए भी एक संकेत है।
प्रदेश में वापसी की चर्चा: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली की जिम्मेदारी से मुक्त होने के बाद अब भंवर जितेंद्र सिंह राजस्थान की राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
नैतिक दबाव: उनके इस कदम ने पार्टी के अन्य प्रभारियों और नेताओं पर भी हार की जिम्मेदारी लेने का नैतिक दबाव बना दिया है।
गांधी परिवार का भरोसा: पद छोड़ने के बावजूद सिंह ने स्पष्ट किया है कि वे कांग्रेस के मूल्यों और दृष्टिकोण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
असम की हार की जिम्मेदारी लेकर जितेंद्र सिंह ने खुद को एक 'सिद्धांतवादी नेता' के रूप में स्थापित किया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या मल्लिकार्जुन खड़गे उनका इस्तीफा स्वीकार करेंगे? या फिर राजस्थान की राजनीति में उन्हें कोई बड़ी और नई जिम्मेदारी मिलने वाली है? सस्पेंस अभी बरकरार है।
Updated on:
04 May 2026 10:24 pm
Published on:
04 May 2026 10:15 pm
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