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सीकर। हाथ आया पर मुंह न लगा की कहावत तो आपने सुनी होगी। ये अवसर आने पर भी उसका लाभ नहीं मिलने पर कही जाती है। ये कहावत प्रदेश की करीब 6 हजार सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूलों पर दूसरी बार चरितार्थ हो रही है।
दरअसल, ये वे स्कूलें हैं जो पिछले पांच सालों में क्रमोन्नत तो हो गई, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक उनमें पदों की वित्तीय स्वीकृति ही जारी नहीं की है।
ऐसे में वरिष्ठ अध्यापकों की पदोन्नति से प्रदेश की सरकारी स्कूलों को 12 हजार 119 व्याख्याता मिलना तो तय हो गया है, लेकिन पद स्वीकृती के अभाव में इन स्कूलों को फिर उनका लाभ नहीं मिलेगा। इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ व्याख्याताओं की काउंसलिंग पर भी पड़ेगा।
शिक्षा विभाग की पिछले साल की डीपीसी में भी ये स्कूल पदों की वित्तीय स्वीकृति के अभाव में व्याख्याता पद से वंचित रह गए थे। पिछले साल भी विभाग में सत्र 2021—22 व 2022—23 की करीब साढ़े 10 हजार पदों पर पदोन्नति की थी। पर इन स्कूलों में पदों की स्वीकृति नहीं होने से ये स्कूल कांउसलिंग में शामिल नहीं हो सके।
क्रमोन्नत हुई स्कूलों में सबसे ज्यादा आवश्यकता व्याख्याताओं की है। इनमें माध्यमिक से उच्च माध्यमिक 4075 व उच्च प्राथमिक से उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत 1825 स्कूलों में व्याख्याता के कम से कम तीन पदों के हिसाब से कुल 17 हजार 700 पदों की स्वीकृति का इंतजार है।
इसी तरह उच्च प्राथमिक से माध्यमिक व उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत 1307 में कुल 7842 पदों की मांग है। इस तरह क्रमोन्नत स्कूलों में 25 हजार 542 पद चाहिए। हालांकि इनमें से जिन स्कूलों को महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम में तब्दील किया उनमें जरूर पद स्वीकृत किए गए।
क्रमोन्नत स्कूलों में पद स्वीकृत नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सबसे ज्यादा नुकसान बोर्ड परीक्षार्थियों को हो रहा है। जो व्यवस्थार्थ या बिना शिक्षक के पढ़ने को मजबूर हैं। वहीं पदोन्नति व नई भर्ती में चयनित शिक्षकों को भी इन स्कूलों में नियुक्ति का विकल्प नहीं मिल पा रहा।
इधर, पदोन्नत व्याख्याताओं की नियुक्ति के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अस्थायी वरीयता सूची पर आपत्तियां आमंत्रण के बाद सोमवार को आपत्तियों का निस्तारण करके स्थायी वरीयता सूची व रिक्तियों का प्रकाशन किया जाना प्रस्तावित है। 6 से 8 मई तक ऑनलाईन विद्यालय विकल्प भरने के बाद 11 मई को मेरिट रिपोर्ट तैयार कर 12 मई को अंतिम पदस्थापन आदेश जारी किया जाएगा।
सरकार को क्रमोन्नत सभी स्कूलों में पदों की वित्तीय स्वीकृति जारी कर उन्हें भी काउंसलिग में शामिल करना चाहिए। तभी पदोन्नति का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों और व्याख्याताओं दोनों को मिल सकेगा।
पिछले 5 सत्र में क्रमोन्नत 6 हजार से अधिक उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 5 वर्ष बाद भी व्याख्याताओं के पदों की वितीय स्वीकृति जारी नहीं होने से पदोन्नत व्याख्याताओं का इनमें पदस्थापन नहीं हो पाएगा। सरकार को क्रमोन्नत स्कूलों में व्याख्याताओं के पद स्वीकृत कर उनमें भी व्याख्याता नियुक्त करने चाहिए।
Updated on:
04 May 2026 03:05 pm
Published on:
04 May 2026 03:05 pm
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