
सीकर. जिले में वन विभाग की सात रेंज में चल रही वन्य जीव गणना शनिवार सुबह पांच बजे पूरी हुई। गणना के दौरान नीमकाथाना के बालेश्वर कंजरर्वेशन में पानी की खेळी के पास तड़के तीन बजे एक पैंथर पहुंचा। पानी पीने के बाद पैँथर वहां कई देर तक दहाड़ता रहा। पाटन रेंज में पैंथर जैसे कई वन्यजीवों के पगमार्क मिले। गणना के दौरान नीलगाय, सियार, लोमड़ी, खरगोश, बंदर, सेही सहित अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी से वन्य प्रेमियो की बांछे खिल उठी। रामगढ शेखावाटी वनक्षेत्र में हरिण की संख्या में बढ़ोतरी हुई। चौबीस घंटे तक हुई गणना के दौरान अनुकूल मौसम के साथ चांदनी रात ने भी अहम भूमिका निभाई। धवल चांदनी में वाटर होल्स और वन क्षेत्रों में कई वन्यजीव स्पष्ट रूप से नजर आए, जिससे आंकड़ों की सटीकता बढ़ने की उम्मीद है। जिले में 80 प्रतिशत घना वनक्षेत्र नीमकाथाना व पाटन रेंज के अधीन है हालांकि बारिश संग अंधड के कारण आस-पास के इलाके के कई वाटरहोल में पानी भर गया और वन्य जीव विभाग की ओर से तय किए वाटर होल तक नहीं पहुंचे जिससे गणना के सटीक परिणाम नहीं आए। गौरतलब है कि जिले में शुक्रवार शाम पांच बजे से जिले के 86 वाटरहोल पर वन्यजीव गणना शुरू की गई थी।
नीमकाथाना वन क्षेत्र में एक बड़े पैंथर एवं छोटे पैंथर के पगमार्क दिखाई दिए। पगमार्क मिलने की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पगमार्क उठाए। प्रथम दृष्टया पगमार्क पैंथर के ही है। सटीक पुष्टि के लिए पगमार्क संबंधी जानकारी प्रदेश स्तर पर भेजी जाएगी। गौरतलब है कि अरावली की पहाड़ी की तलहटी में बसे में घुसकर शिकार कर चुके हैं। जिला मुख्यालय सहित आस-पास पैंथर नजर आ चुका है।
फतेहपुर वन विभाग के अधीन आने वाले क्षेत्र में हरिणों का कुनबा बढ़ा है। वन्य जीव जनगणना 2026 में हरिणों की संख्या में 24 का इजाफा हुआ है। फतेहपुर क्षेत्रीय वन अधिकारी नरेन्द्र सिंह राजपूत ने बताया कि वन विभाग की ओर से रामगढ़ के कृष्ण गौशाला के बीड, सवाई लक्ष्मणपुरा, रामसीसर सहित फतेहपुर के बीहड क्षेत्र 11 वाटर पाइंट पर वन्य जीवों की गणना की गई। गणना में 2337 वन्य जीवों मिले। जिनमें जीव गणना में 1426 हरिण, 545 मोर, नील गाय 274, जंगली बिल्ली 7, लोमडी 18, काला तीतर 46, सियार गीदड 21 शामिल रहे। हिरणों के संरक्षण व सम्वद्धन के लिये वन विभाग की ओर से क्षेत्र में बीहड में विशेष घास उगाई जा रही है। जिससें आने वाले समय में ताल छापर के जैसे यहां भी हरिणों के आवास के लिये उपयोगी जगह होगी।
वन विभाग की गणना में सीकर के हर्ष, पाटन, नीमकाथाना में गीदड़, पाटन व सीकर में जरख, दांता, सीकर, पाटन, श्रीमाधोपुर में जंगली बिल्ली और लक्ष्मणगढ रेंज में पाई जाने वाली मरू लोमड़ी व श्रीमाधोपुर के बालवाड़ क्षेत्र में भेडिए नजर आ चुके हैं। वहीं नीमकाथाना व शाकंबरी रेंज में चार वाटर प्वाइंट ऐसे हैं जहां बघेरे और सारस की पुष्टि हो चुकी है। नीमकाथाना के भीतरली गांवडी इलाके में सांभर नजर आ चुका है।
Updated on:
06 May 2026 06:27 pm
Published on:
04 May 2026 09:30 pm
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