
Shaheed Mahesh Kumar Village Hanspur Shrimadhopur Sikar
श्रीमाधोपुर. राजस्थान के सीकर जिले के गांव हांसपुर क्षेत्र की बीजावाली ढाणी के जवान महेश की पार्थिव देह रविवार शाम श्रीमाधोपुर पहुंची। सोमवार दोपहर उनके पैतृक गांव बीजावाली के पास सतीवाला जोहड़ा सैन्य सम्मान से अंत्येष्टि की जाएगी। 24 वर्षीय महेश मिठारवाल 19 अक्टूबर को द्रास सेक्टर में भूस्खलन होने से शहीद हो गया था।
तिरंगे में लिपटी शहीद की पार्थिव देह पुलिस थाने से सुबह आठ बजे सडक मार्ग से बाइक रैली के साथ उनके गांव ले जाई जाएगी। महेश कुमार मिठारवाल पुत्र गिरधारीलाल मिठारवाल तीन साल पहले 6 राज आरआइएफ बटालियन में भर्ती हुआ था। करीब बीस माह पूर्व रॉयल निवासी सुमन के साथ महेश की शादी हुई थी।
महेश कुमार के 10 माह की बेटी है। किसान परिवार में जन्मे महेश के पिता गिरधारीलाल टैम्पो चलाते हैं। करीब चार माह पहले गांव आया महेश इस दीपावली पर गांव आने वाला था, करीब 20 दिन पहले ही बेटा तिरंगे में लिपटकर घर लौटा तो कोई आंसू नहीं रोक पाया।
भूस्खलन होने से हुए शहीद
श्रीमाधोपुर. हांसपुर के बीजावाली ढाणी निवासी महेश कुमार मिठारवाल 19 अक्टूबर को द्रास सेक्टर में भूस्खलन होने से शहीद हो गया। सैनिक कल्याण अधिकारी नीमकाथाना सुरेन्द्रसिंह के अनुसार शहीद का शव रविवार सुबह दिल्ली पहुंचेगा व शाम को श्रीमाधोपुर पुलिस स्टेशन पहुंचेगा। शहीद का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार सोमवार सुबह उनके पैतृक गांव ढाणी बीजावाली में किया जाएगा।
शहीद महेश की पार्थिव देह रविवार सुबह दिल्ली पहुंचेगी जहां पर शहीद को आर्मी के द्वारा सम्मान दिया जाएगा उसके बाद श्रीमाधोपुर के लिए शहीद का शव सडक मार्ग से रवाना किया जाएगा जो शाम तक श्रीमाधोपुर पहुंचेगा। रास्ते में जगह जगह शहीद के शव पर पुष्पवर्षा की जाएगी।
सीकर/श्रीमाधोपुर. लफ्जों के कोई मायने भी नहीं...लफ्ज मुंह से निकले भी नहीं। बस आंसुओं से भीगी आंखों से करूण क्रंदन! प्राणों का उत्सर्ग करने वाले महेश की पत्नी सुमन के लिए भारी-भरकम शब्दों में सांत्वना के बोलों का कोई मतलब नहीं था। इस वीरांगना के लिए कुछ पलों के लिए ये सब बेमानी लब्ज थे। जिंदगीभर साथ निभाने का वादा करने वाला डेढ़ साल भी साथ नहीं निभा सका। शनिवार को श्रीमाधोपुर के हांसपुर क्षेत्र की ढाणी बीजावाली गांव में सन्नाटा पसरा था। कुछ घरों की इस बस्ती में रात और लोग दोनों ही बैचेन रहे।
द्रास सेक्टर में शहीद हुए महेश का पार्थिव शरीर रविवार शाम तक गांव पहुंचेगा, लेकिन सूचना पहले ही पहुंच गई। इस सूचना के साथ ही न केवल उनकी ढाणी बल्कि नजदीक के हांसपुर गांव में भी लोग जमा हो गए। हालांकि महेश के घर पर महिलाओं को इसकी जानकारी नहीं। केवल पत्नी सुमन पति की शहादत के बारे में जानती है। इधर, जानकारी मिलने पर लोग सेना के अधिकारियों से पुष्टि करने में जुट गए।
पत्नी के मोबाइल पर आया फोन, भाई के आंसुओं से समझ गई सब कुछ
सुमन इन दिनों अपने मायके रॉयल में है। शनिवार को उसी के मोबाइल पर आर्मी से फोन आया था। कहा गया कि किसी पुरुष परिजन से बात करा दो, भाई से बात करवाई, तो छोटा भाई सुनते ही रो पड़ा। सुमन भी पहले तो समझ नहीं पाई, लेकिन भाई की आंखों में बहते आंसुओं ने सब कुछ बिना कहे ही कह दिया। वह शनिवार रात को ही ससुराल आने की जिद कर रही थी, लेकिन परिजनों ने समझाकर रोका। अभी शव आने में ही काफी वक्त लगेगा। इधर, शनिवार को हांसपुर का माहौल भी गमगीन बना नजर आया।
बचपन से ही सेना में जाने की चाह
वह शुरू से ही सेना की तैयारी कर रहा था। दो-तीन साल पहले सीकर में हुई सेना भर्ती रैली में ही उसका चयन हुआ था। प्रशिक्षण के बाद द्रास में उसे नियुक्ति मिली थी। महेश कुमार मिठारवाल तीन साल पहले 6 राज आरआइएफ बटालियन में भर्ती हुआ था।
करीब बीस माह पूर्व महेश की रॉयल निवासी सुमन के साथ शादी हुई थी। महेश कुमार के एक सात माह की बेटी है। महेश के पिता गिरधारीलाल टैम्पो चलाते हैं।
पिता गर्वित, गांव में रातभर चर्चा
शहीद के पिता गिरधारीलाल गर्वित तो थे, लेकिन आंखें नम ही नजर आई। गांव के जवान की शहादत से गांववालों के सीने भी फख्र से तने थे, लेकिन कोई आंख ऐसी न थी, जिसमें आंसू न थे। गांव का माहौल आज बदला हुआ था। हर जुबां महेश की जांबाजी की चर्चा कर रही थी। गांववालों ने बताया कि महेश बचपन से ही मिलनसार व युवाओं का चहेता था। महज 24 साल के महेश को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था।
Updated on:
22 Oct 2018 03:38 pm
Published on:
22 Oct 2018 12:09 pm
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