
नोटबंदी के बाद से प्रधानमंत्री केशलैस खरीददारी पर जोर दे रहें, लेकिन उनकी ही भारतीय जनता पार्र्टी से जुड़े जनप्रतिनिधि उस पर अमल नहीं कर रहे हैं। शहर विधायक व भाजपा जिलाध्यक्ष, नीमकाथाना प्रधान के पास एटीएम व डेबिट कार्ड तक नहीं है।
सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन पत्रिका ने जब इस संबंध में भाजपा के पार्षद, जनप्रतिनिधियों से बात की तो कई जनप्रतिनिधियों को ई मेल एड्रेस तक याद नहीं। जिन जनप्रतिनिधियों ने ई मेल बना रखी है उसे दूसरा व्यक्ति ऑपरेट कर रहा है। कई जनप्रतिनिधियों ने तो ई मेल एड्रेस तक नहीं बना रखा है। ना ही क्रेडिट कार्ड ले रखे हैं और ना ही किसी मोबाइल एप का सहारा है।
पीए और परिजन चलाते हैं ई मेल
सीकर जिले में अधिकांश विधायकों के ई.मेल आईडी उनके निजी सहायक एवं अन्य लोग चला रहे है। जबकि विधायकों के पत्र, डिजायर सहित अन्य गोपनीय जानकारियां भी इसी से उच्चस्तर पर पहुंचाई जाती है। जनप्रतिनिधियों से जुड़े लोगों ने बताया कि इस बार भी तबादलों को लेकर भेजी गई डिजायरों में ऐसा हो चुका है। वहीं, नई करेंसी नहीं छपने के कारण परेशानी बढ़ रही है।
मैं भी करता हूं ईमेल
&डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड, व्हाट्सएप काम में लेता हूं। ईमेल मैं खुद व मेरा पीए काम में लेते हैं। जिससे अपडेट रहता हूूं।
बंशीधर बाजिया, खंडेला, विधायक
डेबिट कार्ड उपयोग करता हूं
&शादी में हूं, ईमेल व डेबिट कार्ड काम में लेता हूं। कैशलेस सिस्टम की कम ही जरूरत पड़ती है।
गोरधन वर्मा, धोद विधायक
चेक से ही भुगतान
मेरा कोई ई मेल आईडी नही हैं। कैशलेस सिस्टम की जरूरत ही नहीं पड़ी। एटीएम कार्ड नहीं है। चेक से बैंक जाकर भुगतान लेता हूं।
संतोष गुर्जर, प्रधान, पाटन
एटीएम नहीं, ईमेल बेटे के हवाले
अभी तक एटीएम कार्ड की जरूरत नहीं पड़ी। ईमेल है लेकिन बेटा या भतीजा ऑपरेट करता है। नोटबंदी के बाद यह कैशलेस सिस्टम अपनाना जरूरत बन गया है।
झाबर सिंह खर्रा, जिलाध्यक्ष भाजपा
पहले कभी जरूरत ही नहीं पड़ी
ऑनलाइन बैंकिंग की कभी जरूरत ही नहीं पड़ी। इससे हमारा क्या काम पड़ता है। एटीएम कार्ड नहीं है। ईमेल पीए चलाता है। किसी एप का भी उपयोग नहीं करता
रतनलाल जलधारी, सीकर विधायक
Published on:
03 Dec 2016 06:15 pm
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