
सीकर। मन में कुछ करने का जूनून हो तो मुसीबतों को हराकर सफलता का परचम लहराया जा सकता है। यह साबित किया है सीकर निवासी पैरा खिलाड़ी रजनी बावरिया ने। मानसिक विमंदित रजनी को देखकर आस-पड़ोस के लोग ताने मारते थे। रजनी ने लोगों के ताने का जवाब देने की ठान ली। वह लगातार पदक जीतकर सीकर का मान बढ़ा रही है। दिल्ली में आयोजित खेलो इंडिया के तहत आयोजित पहले पैरा गेम्स में रजनी ने सीनियर वर्ग की 400 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता है। नियमित अभ्यास और मेहनत के दम पर रजनी अब तक राष्ट्रीय पैरा प्रतियोगिताओं में तीन गोल्ड सहित नौ पदक जीत चुकी है। राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में भी वह 15 से अधिक पदक चुकी है।
सुमन ने भी बढ़ाया मान
इसी प्रतियोगिता में कूदन गांव निवासी सुमन ढाका ने गोला फेंक में सिल्वर मेडल जीता है। वह अब तक 20 से अधिक पदक जीत चुकी है। राज्य सरकार ने खेल कोटे से उसे सार्वजनिक निर्माण विभाग में नौकरी दी थी।
संघर्ष: पाई-पाई जोड़कर दिलाई खेल किट
रजनी की मां नानची देवी व पिता टिक्कू सिंह खेतों में मजदूरी करते हैं। खेल स्टेडियम के पास में ही इनका घर है। बच्चे सुबह-शाम मैदान में पहुंच जाते थे। यहां निशुल्क तैयारी कराने वाले पैरा कोच ने बच्चों की प्रतिभा को देखते हुए नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित किया। इस दौरान माता-पिता ने पाई-पाई जोड़कर बच्चों को खेल किट दिलवाई। कोच इनको अपने खर्चे पर प्रतियोगिताओं में ले जाने लगे।
Published on:
15 Dec 2023 12:58 pm

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