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राजस्थान में बजट ने अटकाया गांवों का विकास, पंचायतों के रुके 4500 करोड़

Panchayati raj. सीकर. गांवों की सरकार के अटके पैसों ने गांव-ढाणियों के विकास कार्यों पर ब्रेक लगा दिया है।

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सीकर

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Ajay Sharma

Mar 02, 2022

राजस्थान में बजट ने अटकाया गांवों का विकास, पंचायतों के रुके 4500 करोड़,

राजस्थान में बजट ने अटकाया गांवों का विकास, पंचायतों के रुके 4500 करोड़,

अजय शर्मा

The budget stalled the development of panchayats in rajasthan सीकर. गांवों की सरकार के अटके पैसों ने गांव-ढाणियों के विकास कार्यों पर ब्रेक लगा दिया है। दरअसल, प्रदेश की ग्राम पंचायतों को वित्त आयोग सहित अन्य योजनाओं का 4500 करोड़ का बजट मिलना है। पिछले एक साल से सरकार ने यह पैसा ग्राम पंचायतों को नहीं दिया है। हालांकि सरकार का दावा है कि वित्त आयोग की एक किश्त फरवरी महीने में प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई गई है, लेकिन सरपंचों की मांग है कि पिछले साल का बकाया पैसा एक साथ जारी किया जाए। जिससे गांव-ढाणियों में विकास कार्य शुरू हो सके। पिछले दिनों सरपंचों ने इसी मांग को लेकर सभी जिलों में आंदोलन भी किए थे। इसके बाद सरकार ने जल्द पैसा जारी कराने का आश्वासन भी दिया था।


सीकर की पंचायतों को मिलने हैं 145 करोड़
सीकर जिले की ग्राम पंचायतों को वित्त आयोग सहित अन्य योजनाओं के अनुदान के जरिए लगभग 145 करोड़ रुपए की राशि मिलनी है। लेकिन यह राशि जारी नहीं हो रही है। इस मामले में जिला परिषद प्रशासन का कहना है कि लंबित पैसे का फैसला सरकार स्तर पर होना है। जबकि इस वित्तीय वर्ष का पैसा लगातार जारी किया जा रहा है।

तीन मामलों से समझें पंचायतों की परेशानी

केस एक: पिछले साल बना प्लान, अभी तक काम शुरू नहीं
सीकर जिले की 20 ग्राम पंचायतों में जनवरी 2020 में नाली निर्माण के लिए प्लान बना था, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ। लोगों का आरोप है कि जब सरपंचों से सम्पर्क करते हैं तो वह बजट नहीं आने का तर्क देते हैं।

केस दो: कैसे चुकाए बिजली-पानी के बिल
सरपंचों का कहना है कि समय पर पैसा नहीं देने की वजह से प्रदेश की 15 फीसदी ग्राम पंचायतों के सामने बिजली-पानी का बिल चुकाना भी चुनौती बना हुआ है। पिछले दिनों कई ग्राम पंचायतों के बिजली कनेक्शन भी कट गए। हालांकि जनप्रतिनिधियों और कलक्टर की वार्ता के बाद ट्यूबवैलों के कनेक्शन वापस जोड़े गए।

केस तीन: मानदेय के लिए भी अलग से प्रावधान नहीं

सरकार की ओर से ग्राम पंचायत स्तर पर मानदेय कर्मचारियों की लगातार फौज बढ़ाई जा रही है, लेकिन इनके मानदेय लिए अलग से प्रावधान नहीं है। फिलहाल ग्राम पंचायतों के खातों से ही पंचायत सहायक, कोविड हेल्थ सहायक, सुरक्षा गार्ड व पंप चालकों का हर महीने भुगतान किया जा रहा है। बजट की कमी से कचरा प्रबंधन के प्रस्ताव भी कागजों में उलझे हैं।


ग्राम पंचायतों को ऐसे मिलेगा पैसा
75 फीसदी सीधे ग्राम पंचायतों के खाते में

20 फीसदी पैसा पंचायत समिति के जरिए
5 फीसदी पैसा जिला परिषद के जरिए


पंचायतों को 40 लाख से 1 करोड़ तक मिलता है पैसा

ग्राम पंचायतों को 40 लाख से एक करोड़ रुपए तक की राशि विकास कार्यों के लिए मिलती है। इसमें मनरेगा के तहत खर्च होने वाला पैसा शामिल नही है। एक्सपर्ट का कहना है कि छोटी ग्राम पंचायतों को 40 लाख रुपए तक का बजट मिलता है। जबकि बड़ी ग्राम पंचायतों को एक करोड़ तक राशि आवंटित होती है। सीकर जिले में बड़ी ग्राम पंचायतों की श्रेणी में 15 ग्राम पंचायतें हैं।


सरकार दें जनता को राहत: सरपंच संघ
सरकार ने पिछले साल ग्राम पंचायतों को पूरा बजट देने का वादा किया था, लेकिन अभी तक राशि नहीं मिली है। विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सीकर जिले की पंचायतों की लगभग 145 करोड़ की राशि बाकी है।

हनुमान प्रसाद झाझड़ा, जिलाध्यक्ष, सरपंच संघ, सीकर


एक किश्त अभी हुई जारी : जिला परिषद
वित्त आयोग की एक किश्त पिछले दिनों ही ग्राम पंचायतों को जारी की गई है। केन्द्रीय वित्त आयोग का पैसा भी इस महीने तक अलॉट होने की संभावना है। बकाया पैसे का मामला राज्य सरकार स्तर पर लंबित है। ग्राम पंचायत बेहतर तरीके से धरातल पर कामकाज कर सके इसके लिए समन्वय के साथ सीकर में सभी योजनाओं को लागू किया जा रहा है।

सुरेश कुमार, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद