
दो हत्या कर विदेश भागे हत्यारे का मौत के दो साल बाद हुआ अंतिम संस्कार, इस हालत में मिला शव
राजस्थान के सीकर जिले के नेछवा गांव में पत्नी व साली के दोहरे हत्याकांड के बाद बहरीन भागे रुल्याणी गांव निवासी एक स्थाई वारंटी के शव को मौत के दो साल बाद वतन की मिट्टी नसीब हुई। मृतक जुगलकिशोर जांगिड़ ने 39 साल पहले दोनों की हत्या की थी। पैरोल पर छूटने के बाद वह फरार होकर बहरीन पहुंच गया था। दो साल पहले हार्ट अटैक से मौत के बाद से उसके परिजन शव के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे रहे थे। आखिरकार बुधवार को बहरीन दूतावास ने उसका शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचाया। जिसका गुरुवार को गांव में अंतिम संस्कार किया गया।
केमिकल से दो साल सुरक्षित रखा शव
जुगल किशोर के शव को दो साल तक केमिकल से सुरक्षित रखा गया था। परिजनों को शव बंद ताबूत में दिया गया। जिसे अंत्येष्टि स्थल पर खोला गया। इस दौरान शव पूरी तरह सड़ चुका था।
ससुराल में कहासुनी होने पर की हत्या
जानकारी के अनुसार मृतक जुगल किशोर जांगिड़ की शादी अनोखू गांव में हुई थी। 1985 में वह जब पत्नी को लेने ससुराल गया तो किसी बात को लेकर कहासुनी होने पर उसने पत्नी व साली दोनों की हत्या कर दी। लोसल थाने में परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। कोर्ट ने भी सजा सुना दी। गांव के पूर्व सरपंच लक्ष्मणराम नेतड़ के अनुसार जेल में पढ़ाई करते हुए 1987 में वह पैरोल पर बाहर आया था। तभी फरार होकर वह बहरीन चला गया। जिसकी फरवरी 2022 में मौत हो गई।
35 साल नहीं मिली खबर, मां-बाप व तीन भाई की मौत
बहरीन जाने के बाद से जुगल का परिजनों से कोई संपर्क नहीं रहा। पासपोर्ट पर लिखे पते से 35 साल बाद उसकी मौत की खबर ही परिवार को मिली। तब तक उसके माता-पिता व तीन भाई भी काल का ग्रास बन चुके थे। अब परिवार में जुगल के चार भाई व पांच बहनें मौजूद है।
सरकार से नहीं मिला सहयोग
जुगल की मौत के बाद उसके चार भाईयों सुरेश, रिछपाल, दामोदर व श्रवण ने अपने स्तर पर उसका शव गांव लाने के प्रयास किए। पूर्व सरपंच लक्ष्मणराम नेतड़ व जयदत्त जांगिड़ ने बताया इस दौरान सरकार से उन्हें कोई अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। जिसके चलते ही दो साल तक वह शव की वतन वापसी में कामयाब नहीं हो सके। अपने स्तर की लंबी लड़ाई के बाद बुधवार को बहरीन से भारतीय दूतावास ने जुगल का शव भेजे जाने की सूचना दी। अंतिम संस्कार में परिवार के कुछ लोग व सरपंच मोहित पटवारी, पूर्व सरपंच लक्ष्मणराम नेतड़, पंस सदस्य सोहन लाल रणवां, जयदत्त जांगिड़ आदि शामिल हुए।
मजदूरी कर किया कारोबार
ग्रामीणों व घरवालों के अनुसार जुगल ने बहरीन में शुरू में मजदूरी की। बाद में रुपए जमा कर साझेदारी में कारोबार शुरू कर लिया। जिसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। शव के साथ जुगल के कोई दस्तावेज व अन्य जानकारी भी नहीं मिल पाई है।
संपति को लेकर हुआ विवाद!
जुगल की मौत के बाद बहरीन में उसकी संपति को लेकर विवाद की बात भी सामने आई है। जानकारी के अनुसार भारतीय दूतावास में भाईयों के दावे से पहले बहरीन में उसके साझेदारों ने उसकी सपंति के लिए दावा कर दिया था। पर उसके भाइयों का पत्र पहुंचने पर दूतावास ने जांच कर फर्जी पाए जाने पर उन दावेदारों के खिलाफ कार्रवाई की।
Updated on:
15 Mar 2024 04:57 pm
Published on:
15 Mar 2024 11:23 am

बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
