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SPECIAL NEWS: पाकिस्तान में 80 किमी घुसकर किया था छाछरो पर कब्जा

आज ही के दिन सात दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना के 10 पैरा कमांडों बटालियन के सैनिकों ने 80 किलोमीटर पाकिस्तान में घुसकर छाछरो शहर पर कब्जा कर फतेह हासिल की थी। इस युद्ध में शेखावाटी के जांबाजों ने भी भाग लेकर शौर्य व युद्ध कौशल का लोहा मनवाया था।

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सीकर

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Mukesh Kumawat

Dec 07, 2023

SPECIAL NEWS: पाकिस्तान में 80 किमी घुसकर किया था छाछरो पर कब्जा

SPECIAL NEWS: पाकिस्तान में 80 किमी घुसकर किया था छाछरो पर कब्जा

सीकर/मावंडा. आज ही के दिन सात दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना के 10 पैरा कमांडों बटालियन के सैनिकों ने 80 किलोमीटर पाकिस्तान में घुसकर छाछरो शहर पर कब्जा कर फतेह हासिल की थी। इस युद्ध में शेखावाटी के जांबाजों ने भी भाग लेकर शौर्य व युद्ध कौशल का लोहा मनवाया था। युद्ध के बाद हमारे सैनिकों ने वहां के डरे सहमे भूखे प्यासे नागरिकों को राहत देकर मानवीय फर्ज भी निभाया था। इस युद्ध में तंवरावाटी क्षेत्र के राम सिंह तंवर, बीरबल सिंह तंवर, मदन सिंह तंवर व हनुमान सिंह तंवर ने भाग लिया था । छाछरो युद्धवीर राम सिंह तंवर बताते हैं कि छाछरो युद्ध महावीर चक्र विजेता जयपुर क ब्रिगेडियर सवाई भवानी सिंह के नेतृत्व में लड़ा गया था। इसमें पाकिस्तान के छाछरो शहर पर कब्जा करने के बाद पाकिस्तान के नागरिक डरे सहमे हुए थे। ऐसे में उनकी बटालियन के सैनिकों ने मानवता दिखाते हुए उनके लिए खाने पीने की व्यवस्था कर उनको भरोसा दिलाया था कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है । युद्ध में शामिल रहे डाबला निवासी कमांडो पूर्व सैनिक मदन सिंह ने बताया कि पाकिस्तान में अन्दर घुसकर छाछरो पर कब्जा करने के पीछे ब्रिगेडियर सवाई भवानी सिंह का मजबूत खुफिया तंत्र का बहुत बड़ा योगदान रहा था । युद्ध में भाग ले चुके भूदौली निवासी बीरबल सिंह तंवर व डाबला की बख्सू सिंह की ढाणी निवासी हनुमान सिंह तंवर का निधन हो चुका है। छाछरो युद्धवीर हनुमान सिंह तंवर का 17 अगस्त 2022 को निधन हो गया था। उनके निधन पर शोकसभा हुई थी। इसमें क्षेत्र के पूर्व सैनिकों ने युद्धवीर तंवर को श्रद्धांजलि अर्पति की थी। इसमें ब्रिगेडियर भवानी सिंह की बेटी एवं भाजपा नेत्री दीया कुमारी सहित प्रदेश के विशिष्टजनों ने भी शिरकत की थी। इसी तरह छाछरो युद्ध का नेतृत्व करने वाले ब्रिगेडियर सवाई भवानी सिंह के निधन होने पर 21 अप्रैल 2011 को नाथा की नांगल स्थित राजपूतों की ढाणी में शोकसभा कर उनको श्रद्धांजलि दी थी ।